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9 Aug 2023 · 1 min read

रोटी की ख़ातिर जीना जी

रोटी की ख़ातिर जीना जी
रोटी के हित ही मरना जी
रोटी कब मिलती है बैठे
सब रात दिवस इक करना जी
भूखे को चाँद लगे रोटी
कुदरत का यूँ भी छलना जी
नींद न आये क्यों भूखे को
जल पी के हाय तड़पना जी
– महावीर उत्तरांचली

1 Like · 332 Views
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