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6 Apr 2024 · 1 min read

रेल चलय छुक-छुक

रेल चलय छुक छुक
धुआँ निकलय भुक भुक।

रेल ल देखिच बुढ़वा बबा
इहाँ-उहाँ ले डब्बे डब्बा
हाथ बताके बोलय रुक रुक,
रेल चलय छुक छुक।

रेल म बैठिच मुन्ना राजा
सीटी परय बाजै बाजा
सोचे लगिस कुछ कुछ
रेल चलय छुक छुक।

मेरी प्रकाशित कृति बाल साहित्य से।

डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
साहित्य वाचस्पति
बेस्ट पोएट ऑफ दि ईयर।

Language: Chhattisgarhi
Tag: Poem
1 Like · 1 Comment · 44 Views
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