Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Oct 2022 · 1 min read

रूठ जाने लगे हैं

नजरें वह हमसे चुराने लगे हैं।
महफ़िल किसी और के सजाने लगे हैं।।

बात करने के बहाने जो कभी ढूंढा करते थे ।
आज बात न करने के बहाने बनाने लगे हैं।।

छोटी-छोटी गलतियों पर रूठ जाने लगे हैं ।
लगता है दिल में किसी और को बसाने लगे हैं।।

जिन गलियों से हर रोज गुजरा करते थे कभी ।
उन्हीं गलियों का रास्ता भूल जाने लगे हैं ।।

नजरे वह हमसे चुराने लगे हैं।
लगता है कहीं और आशियाना बनाने लगे हैं।।

गौरी तिवारी
भागलपुर बिहार

Language: Hindi
Tag: ग़ज़ल
4 Likes · 4 Comments · 72 Views
You may also like:
■ मुक्तक / ख़ाली और भरा...
*Author प्रणय प्रभात*
गणतंत्र दिवस
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
मेरे एहसास का
Dr fauzia Naseem shad
विचार
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
आज किस्सा हुआ तमाम है।
Taj Mohammad
"खिलौने"
Dr Meenu Poonia
!! नारियों की शक्ति !!
RAJA KUMAR 'CHOURASIA'
✍️जुर्म संगीन था...✍️
'अशांत' शेखर
फास्ट फूड
Utsav Kumar Aarya
वो हैं , छिपे हुए...
मनोज कर्ण
उदासीनता
ओनिका सेतिया 'अनु '
इरादे नहीं पाक,
Satish Srijan
हम देखते ही रह गये
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
आओ मनायें आजादी का पावन त्योहार
Anamika Singh
अंगार
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
“ मिलि -जुलि केँ दूनू काज करू ”
DrLakshman Jha Parimal
नदी सा प्यार
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बेरोजगार आशिक
Shekhar Chandra Mitra
सब्जियों पर लिखी कविता
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
सुनती नहीं तुम
शिव प्रताप लोधी
मेरे मन के भाव
Ram Krishan Rastogi
एक चेहरा मन को भाता है
कवि दीपक बवेजा
*"यूँ ही कुछ भी नही बदलता"*
Shashi kala vyas
परिन्दे धुआं से डरते हैं
Shivkumar Bilagrami
परिणय के बंधन से
Dr. Sunita Singh
जाड़े की दस्तक को सुनकर
Dr Archana Gupta
*नेताजी सुभाष चंद्र बोस (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
तुमको पाकर जानें हम अधूरे क्यों हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
दूर....
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
गुरु
Mamta Rani
Loading...