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30 Aug 2023 · 1 min read

रूठकर के खुदसे

रूठकर के खुदसे ही मैं
शांत एकांत जगह कहीं जाकर
ख़्वाबों के सरहाने बैठ जाती हूं
देखकर यूं अकेला मुझको
सब पूछने फिर लगते है
कि सब ठीक तो है ना?
कुछ देर सोचती हूं
और फिर नजरे चुराती हूं
“हां, सब ठीक है”
ये झूठ सबसे मैं…,
ना जाने कितनी बार कहती हूं।

– सुमन मीना (अदिति)

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