Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Jul 2016 · 1 min read

राज दोहावली से:-

तुकबंदी से तुकबनी, कविता लई बनाय |
भाषा के दुश्मन यहां, कविराज कहलाये ||

Language: Hindi
431 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मेरे सपनों का भारत
मेरे सपनों का भारत
Neelam Sharma
तेरी चाहत हमारी फितरत
तेरी चाहत हमारी फितरत
Dr. Man Mohan Krishna
गुफ्तगू तुझसे करनी बहुत ज़रूरी है ।
गुफ्तगू तुझसे करनी बहुत ज़रूरी है ।
Phool gufran
वक़्त ने किया है अनगिनत सवाल तपते...
वक़्त ने किया है अनगिनत सवाल तपते...
सिद्धार्थ गोरखपुरी
सुकून की तलाश है
सुकून की तलाश है
Surinder blackpen
जीवन की जर्जर कश्ती है,तुम दरिया हो पार लगाओ...
जीवन की जर्जर कश्ती है,तुम दरिया हो पार लगाओ...
दीपक झा रुद्रा
यायावर
यायावर
Satish Srijan
पातुक
पातुक
शांतिलाल सोनी
सच का सूरज
सच का सूरज
Shekhar Chandra Mitra
मोहि मन भावै, स्नेह की बोली,
मोहि मन भावै, स्नेह की बोली,
राकेश चौरसिया
Dear myself,
Dear myself,
पूर्वार्थ
एक नासूर ये गरीबी है
एक नासूर ये गरीबी है
Dr fauzia Naseem shad
हिन्दी दिवस
हिन्दी दिवस
SHAMA PARVEEN
कर गमलो से शोभित जिसका
कर गमलो से शोभित जिसका
प्रेमदास वसु सुरेखा
मारी - मारी फिर रही ,अब तक थी बेकार (कुंडलिया)
मारी - मारी फिर रही ,अब तक थी बेकार (कुंडलिया)
Ravi Prakash
स्वार्थी नेता
स्वार्थी नेता
पंकज कुमार कर्ण
🦋🦋दिल में बसाते हैं, पर एतबार नहीं करते🦋🦋
🦋🦋दिल में बसाते हैं, पर एतबार नहीं करते🦋🦋
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
मैं 🦾गौरव हूं देश 🇮🇳🇮🇳🇮🇳का
मैं 🦾गौरव हूं देश 🇮🇳🇮🇳🇮🇳का
डॉ० रोहित कौशिक
23/164.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/164.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Under this naked sky, I wish to hold you in my arms tight.
Under this naked sky, I wish to hold you in my arms tight.
Manisha Manjari
यह रंगीन मतलबी दुनियां
यह रंगीन मतलबी दुनियां
कार्तिक नितिन शर्मा
हे आदमी, क्यों समझदार होकर भी, नासमझी कर रहे हो?
हे आदमी, क्यों समझदार होकर भी, नासमझी कर रहे हो?
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
“सुरक्षा में चूक” (संस्मरण-फौजी दर्पण)
“सुरक्षा में चूक” (संस्मरण-फौजी दर्पण)
DrLakshman Jha Parimal
दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
दीवारें ऊँचीं हुईं, आँगन पर वीरान ।
Arvind trivedi
वापस
वापस
Harish Srivastava
पहले नामकरण
पहले नामकरण
*Author प्रणय प्रभात*
Maturity is not when we start observing , judging or critici
Maturity is not when we start observing , judging or critici
Leena Anand
कुंडलिया छंद *
कुंडलिया छंद *
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
गुजारे गए कुछ खुशी के पल,
गुजारे गए कुछ खुशी के पल,
Arun B Jain
हार मानूंगा नही।
हार मानूंगा नही।
Rj Anand Prajapati
Loading...