Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Oct 2023 · 1 min read

* याद कर लें *

** गीतिका **
~~
आज शैशवकाल अपना याद कर लें।
दूर हम अपना तनिक अवसाद कर लें।

कीमती है हर समय जो सामने है।
एक पल भी क्यों भला बर्बाद कर लें।

सोच कर हम हर कदम आगे बढ़ाएं।
दूर मन में बस चुका उन्माद कर लें।

व्यर्थ के कुछ ढोल हैं हमने उठाए।
बंधनों से जिन्दगी आजाद कर लें।

जो समय बीता नहीं है लौट सकता।
है उचित हम आपसी संवाद कर लें।

साथ कोई हर समय देता नहीं जब।
हम इरादों को स्वयं फौलाद कर लें।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य, २९/१०/२०२३

1 Like · 1 Comment · 92 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from surenderpal vaidya
View all
You may also like:
समस्त जगतकी बहर लहर पर,
समस्त जगतकी बहर लहर पर,
Neelam Sharma
" जब तक आप लोग पढोगे नहीं, तो जानोगे कैसे,
शेखर सिंह
■ आज का शेर...
■ आज का शेर...
*प्रणय प्रभात*
लोग ऐसे दिखावा करते हैं
लोग ऐसे दिखावा करते हैं
ruby kumari
Quote - If we ignore others means we ignore society. This way we ign
Quote - If we ignore others means we ignore society. This way we ign
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
ञ'पर क्या लिखूं
ञ'पर क्या लिखूं
Satish Srijan
वो ख्वाबों में अब भी चमन ढूंढ़ते हैं।
वो ख्वाबों में अब भी चमन ढूंढ़ते हैं।
Phool gufran
प्यार भरी चांदनी रात
प्यार भरी चांदनी रात
नूरफातिमा खातून नूरी
जन्म-जन्म का साथ.....
जन्म-जन्म का साथ.....
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
#drarunkumarshastri
#drarunkumarshastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जो ज़िम्मेदारियों से बंधे होते हैं
जो ज़िम्मेदारियों से बंधे होते हैं
Paras Nath Jha
शुभ प्रभात संदेश
शुभ प्रभात संदेश
Kumud Srivastava
धोखा था ये आंख का
धोखा था ये आंख का
RAMESH SHARMA
मुक्तक
मुक्तक
जगदीश शर्मा सहज
चिंतन और अनुप्रिया
चिंतन और अनुप्रिया
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
कहते हो इश्क़ में कुछ पाया नहीं।
कहते हो इश्क़ में कुछ पाया नहीं।
Manoj Mahato
गजल सी रचना
गजल सी रचना
Kanchan Khanna
ସାଧୁ ସଙ୍ଗ
ସାଧୁ ସଙ୍ଗ
Bidyadhar Mantry
हमको इतनी आस बहुत है
हमको इतनी आस बहुत है
Dr. Alpana Suhasini
*पाऍं कैसे ब्रह्म को, आओ करें विचार (कुंडलिया)*
*पाऍं कैसे ब्रह्म को, आओ करें विचार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
"आकांक्षा" हिन्दी ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
3460🌷 *पूर्णिका* 🌷
3460🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
"जगत-जननी"
Dr. Kishan tandon kranti
एक इश्क में डूबी हुई लड़की कभी भी अपने आशिक दीवाने लड़के को
एक इश्क में डूबी हुई लड़की कभी भी अपने आशिक दीवाने लड़के को
Rj Anand Prajapati
गुजर गई कैसे यह जिंदगी, हुआ नहीं कुछ अहसास हमको
गुजर गई कैसे यह जिंदगी, हुआ नहीं कुछ अहसास हमको
gurudeenverma198
गोलगप्पा/पानीपूरी
गोलगप्पा/पानीपूरी
लक्ष्मी सिंह
पतंग*
पतंग*
Madhu Shah
कितने लोग मिले थे, कितने बिछड़ गए ,
कितने लोग मिले थे, कितने बिछड़ गए ,
Neelofar Khan
शक्ति का पूंजी मनुष्य की मनुष्यता में है।
शक्ति का पूंजी मनुष्य की मनुष्यता में है।
प्रेमदास वसु सुरेखा
सहमी -सहमी सी है नज़र तो नहीं
सहमी -सहमी सी है नज़र तो नहीं
Shweta Soni
Loading...