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11 Jun 2023 · 1 min read

यादों का झरोखा

इक बार चलो फिर लौट चलें
यादों के उस वातायन में
जहां साथ बिताए अनगिन पल
दस्तक देते मन आंगन में

कुछ बातें कर्मठ जीवन की
कुछ उलझी सुलझी गिरहों की
कुछ जिद ख्वाबों को जीने की
एक नई लीक पर चलने की,

बहनें जब विदा हुईं घर से
सूना था आंगन इस घर का
एक नई भोर की आभा से
आगाज़ हुआ था खुशियों का

भैया के दामन से बंधकर जब
उतरी थी नीरा भाभी की डोली
छलकी थी गागर खुशियों की
महकी थी जीवन की डाली

माना परिवर्तन नियम अटल
और मिलन-विरह दो पाखी हैं
पर सत्य यही जीवन पथ का
सब आते जाते राही हैं,
आशीष सदा रखना हम पर
इतने के हम अभिलाषी हैं।

Language: Hindi
1 Like · 277 Views
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