Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
27 Jul 2023 · 3 min read

“ मैथिली ग्रुप आ मिथिला राज्य ”

डॉ लक्ष्मण झा ” परिमल ”
=================================
उत्तरदायित्व क बोझ स्वतः आबि जाइत अछि ! हमरा लोकनि जाहि देश मे जन्म लैत छी वोही देश क उन्नति क उत्तरदायित्व हमरा लोकनिक कान्ह पर आबि जाइत अछि ! नीक नागरिक बननाय ,कुशल शिक्षक भेनाइ ,शिष्ठ विद्यार्थी ,नीक प्रशासक ,ईमानदार नेता ,निर्विवाद सूचना आ प्रसारण इत्यादि गप्प सपने एहन प्रतीत होइत अछि ! किछु उत्तरदायित्व केँ हम स्वयं ग्रहण करैत छी आ किछु जिम्मेदारी हमरा देल जाइत अछि ! एहि उत्तरदायित्व केँ सब परिस्थिति मे निभाबय पड़ैत छैक अन्यथा हमरा लोकनि केँ अकर्मण्यता क सिंहासन पर आरूढ़ होमय पड़त ! सम्पूर्ण व्यवस्था बूझू चरमरा जाएत ! लोक केँ लोक सँ विश्वास खत्म भ जाएत !
आइ काल्हि फेसबूक क रंगमंच पर अनगिनत ग्रुप साहित्यिक ,कविता ,लिपि ,संस्कृति ,उपन्यास ,खेल -कूद ,चित्रकारी इत्यादि क पादुर्भाव भ गेल अछि ! विश्व क समस्त भाषा आ विभिन्य क्षेत्र क अलग -अलग ग्रुप बनि गेल अछि ! अधिकाशतः ग्रुप अपन उत्तरदायित्व केँ भली भाँति जनैत अछि ! इ अपन उद्देश केँ निर्णय करि एकर निर्माण करैत अछि आ हिकर सफर पारदर्शिता पर टिकल रहैत अछि ! अपन जिम्मेदारी पर इ सब सदैव अबलम्बित रहैत छथि ! ग्रुप क समस्त सदस्य मूकदर्शक नहि होइत छथि अपितु शिष्टाचार ,नियम ,सादगी ,सकारात्मक ,मधुर्यता क देहरि केँ टपबाक क दुस्साहस कदाचित नहि करैत छथि !
विश्व क पटल पर दूटाबे फेसबूक ग्रुप सँ जुड़बा क सौभाग्य हमरा सहो प्राप्त भेल ! एकटा World Literature Academy आ दोसर World Union of Humanists हमर प्रिय ग्रुप मे संमलित अछि ! कोनो ऐड्मिन आ कोनो माडरैटर क अंकुश नहि अछि परंच हुनकर बको दृष्टि सँ संभवतः कोनो अभद्र लेख वा विचार नहि बचि पाओत ! आहाँ विश्व क समस्त भाषा आ लिपि क प्रयोग क सकैत छी ! हम अपन बात ,कविता ,खिस्सा-पिहानी ,भाषा ,लिपि ,संस्कृति ,परिवेश इत्यादि क चर्चा अपन मैथिली भाषा मे करैत छी ! विश्व क समस्त लोक एकरा पढ़इत आ समालोचना करैत छथि ! हमहूँ विश्व क कृति केँ पढ़इत छी ! हुनकर भाषा आ विधा केँ नजदीक सँ जानय चाहैत छी !
संकीर्णता के शिकंजा मे अधिकांशतः मैथिली ग्रुप फँसल दिखा पड़ैत अछि ! जाहि मैथिली भाषा केँ सम्पूर्ण विश्व स्वीकार करैत अछि वैह मैथिली ग्रुप कोनो अन्य भाषा केँ अस्पृश्यता क नजरि सँ दखैत अछि ! मैथिल अधिकाशतः अपन भाषा ,रीति -रिबाज़ सँ विमुख भेल जा रहल छथि ! मैथिली क अपन लिपि अछि परंतु दुर्भाग्य सँ बहुत कम लोक एकरा पढ़य आ लिखय मे प्रयोग करैत छथि ! आब त गामो मे अधिकांश लोकनि मैथिली केँ अस्पृश्यता क नज़रि सँ देखैत छथि ! बाहर रहय वला मैथिल परिवार अधिकाशतः मैथिली केँ छोड़इत जा रहल अछि !

ढाढ़स ,सांत्वना ,प्रोत्साहन आ उदारता क छोड़ि अधिकांशतः ऐड्मिन ,मोडरेटर एवं मैथिल महंत लोकनि निरंकुशता क अंकुश सँ लोक केँ हतोउत्साह करैत रहैत छथि ! नीक -नीक उत्कृष्ट उपयोगी लेख,विचार,कविता,खिस्सा आ समालोचना केँ बहुत दिन धरि पेंडिंग मे रखि देताह आ अंततः डिक्लाइन करि देताह ! उल -जलूल पोस्ट के अप्रूव्ड करबा मे अपना के गर्व अनुभव करताह ! कखनो -कखनो नरि क असम्मान क कविता केँ स्थान देल जायत परंच मैथिली साहित्यक परिचर्चा केँ डिक्लाइन करि देताह ! आइ संभवतः कियो गिनल -चुनल ऐड्मिन आ मोडरेटर हेताह जे एहन संक्रामक रोग सँ ग्रसित नहि छथि ! महंत लोकनिक गप्प की कहू ? इएह महंत मैथिली साहित्यक विकास क अवरोधक तत्व छथि ! इ उपदेश देताह मुदा क्षेत्रवादिता , जातिवादिता आ आलोचना क आवरण संभवतः कहियो उतारि नहि सकताह !

अपन जिम्मेदारी केँ जाधरि ऐड्मिन ,मोडरेटर आ तथाकथित मैथिल महंत नहि बुझताह , पारदर्शिता क नियम केँ अंगीकार नहि करताह ताधरि मैथिली क आधार स्तम्भ संभवतः कखनो सुदृढ़ नहि भ सकत ! ढाढ़स ,सांत्वना ,प्रोत्साहन आ उदारता क अस्त्र सँ अपन मैथिली भाषा आ संस्कृति क प्रचार -प्रसार भ सकैत अछि आ मिथिला राज्य क निर्माण क मार्ग प्रशस्त भ सकैत अछि !
====================================
डॉ लक्ष्मण झा ” परिमल ”
शिव पहाड़
दुमका
झारखण्ड
भारत

Language: Maithili
Tag: लेख
94 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
■ कैसे भी पढ़ लो...
■ कैसे भी पढ़ लो...
*Author प्रणय प्रभात*
संगदिल
संगदिल
Aman Sinha
जला रहा हूँ ख़ुद को
जला रहा हूँ ख़ुद को
Akash Yadav
पघारे दिव्य रघुनंदन, चले आओ चले आओ।
पघारे दिव्य रघुनंदन, चले आओ चले आओ।
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
नौकरी (२)
नौकरी (२)
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
मुझे पता है।
मुझे पता है।
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
आदमी क्या है - रेत पर लिखे कुछ शब्द ,
आदमी क्या है - रेत पर लिखे कुछ शब्द ,
Anil Mishra Prahari
साइकिल चलाने से प्यार के वो दिन / musafir baitha
साइकिल चलाने से प्यार के वो दिन / musafir baitha
Dr MusafiR BaithA
प्रेम सुधा
प्रेम सुधा
लक्ष्मी सिंह
"फ़ानी दुनिया"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रबुद्ध कौन?
प्रबुद्ध कौन?
Sanjay ' शून्य'
वहां पथ पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।
वहां पथ पथिक कुशलता क्या, जिस पथ पर बिखरे शूल न हों।
Slok maurya "umang"
24/239. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/239. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
17)”माँ”
17)”माँ”
Sapna Arora
होठों को रख कर मौन
होठों को रख कर मौन
हिमांशु Kulshrestha
सफर में हमसफ़र
सफर में हमसफ़र
Atul "Krishn"
हम सनातन वाले हैं
हम सनातन वाले हैं
Shyamsingh Lodhi (Tejpuriya)
अब युद्ध भी मेरा, विजय भी मेरी, निर्बलताओं को जयघोष सुनाना था।
अब युद्ध भी मेरा, विजय भी मेरी, निर्बलताओं को जयघोष सुनाना था।
Manisha Manjari
लक्ष्य एक होता है,
लक्ष्य एक होता है,
नेताम आर सी
दोहा पंचक. . .
दोहा पंचक. . .
sushil sarna
बीता समय अतीत अब,
बीता समय अतीत अब,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
*पद का मद सबसे बड़ा, खुद को जाता भूल* (कुंडलिया)
*पद का मद सबसे बड़ा, खुद को जाता भूल* (कुंडलिया)
Ravi Prakash
अगर गौर से विचार किया जाएगा तो यही पाया जाएगा कि इंसान से ज्
अगर गौर से विचार किया जाएगा तो यही पाया जाएगा कि इंसान से ज्
Seema Verma
मेरे प्रिय पवनपुत्र हनुमान
मेरे प्रिय पवनपुत्र हनुमान
Anamika Tiwari 'annpurna '
रुत चुनाव की आई 🙏
रुत चुनाव की आई 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
वेलेंटाइन डे एक व्यवसाय है जिस दिन होटल और बॉटल( शराब) नशा औ
वेलेंटाइन डे एक व्यवसाय है जिस दिन होटल और बॉटल( शराब) नशा औ
Rj Anand Prajapati
कोई यादों में रहा, कोई ख्यालों में रहा;
कोई यादों में रहा, कोई ख्यालों में रहा;
manjula chauhan
क्यों ना बेफिक्र होकर सोया जाएं.!!
क्यों ना बेफिक्र होकर सोया जाएं.!!
शेखर सिंह
कसम, कसम, हाँ तेरी कसम
कसम, कसम, हाँ तेरी कसम
gurudeenverma198
मंत्र: पिडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
मंत्र: पिडजप्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
Harminder Kaur
Loading...