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13 Feb 2024 · 1 min read

“मैं आग हूँ”

“मैं आग हूँ”
दिलों में लग कर प्यार जगाती हूँ
ज़ज्बे में लग कर इंसान बनाती हूँ
साँच को कभी आने न देती आँच हूँ
मैं आग हूँ.
-डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
साहित्य वाचस्पति

2 Likes · 2 Comments · 145 Views
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