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12 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-83💐

मैंने बस सुकूँ से पयाम भेजे थे,
मुझे अपना गुलाम बना लिया।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
54 Views
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