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11 May 2023 · 1 min read

मेरी निगाहों मे किन गुहानों के निशां खोजते हों,

मेरी निगाहों मे किन गुहानों के निशां खोजते हों,
अरे मैं इतना बुरा भी नहीं हूँ जितना तुम सोचते हों।।

विशाल बाबू ✍️✍️

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