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1 Aug 2023 · 1 min read

मुस्कुराते रहे

ज़ाम भर भर ऩजर से पिलाते रहे
मुझको दीवाना अपना बनाते रहे

नाज़ नखरे दिखा कर इशारों में ही
दूर से पास अपने बुलाते रहे

हाल पूछा न गुजरा भला या बुरा
साज़े- दिल के तराने सुनाते रहे

सामना कर सके जो न हालात का
ख्वाब आँखों में बस वो सजाते रहे

कह नहीं पाए जज्बात अपने कभी
बोझ दिल पर लिए मुस्कुराते रहे

शाम हर रोज उनकी ही अब याद में
चुपके चुपके ग़ज़ल उनकी गाते रहे

तूने सोचा सुधा होगा अंजाम क्या
राह में तो हमें सब डराते रहे

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
16/7/2023
©®

Language: Hindi
2 Likes · 206 Views
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