Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 Feb 2017 · 2 min read

मुर्दे की पहचान….

ज़िंदा रहा होगा इंसान कभी…
जिसकी लाश काँधे पे उठा शमशान जा रहे थे सभी…
घर वाले…रिश्तेदार…दोस्त…साथ थे सभी….
उनमें से किसी के साथ…
मरने वाले का बचपन से ही नाता रहा होगा…
पर आज वो प्राण जाने के बाद…
सिर्फ एक लाश है…मुर्दा…
और मुर्दे को साथ रखने की इजाज़त नहीं है….
कानूनन…सामाजिक…धार्मिक….हर तरह से…
घर में रहने की इजाज़त नहीं है….

मुर्दा या लाश उसी को कहते हैं…
जिसमें अब कोई हलचल नहीं हो सकती…
मतलब कोई भाव नहीं….न दुःख के न सुख के…
उसको कुछ फर्क नहीं पड़ता…
कोई क्या कर रहा…जी रहा या मर रहा…
यही है मुर्दे की पहचान….

फिर जो सरेआम किसी को बीच चौराहे पे…
मार देता है…किसी की इज्जत तार तार कर देता है…
जो जन्म से पहले ही किसी बच्ची को क़त्ल कर देता है…
मारने वाला..साथ देने वाला…और देख कर पत्थर बनने वाला…
किसी में भाव नहीं उठता…क्या हैं वो…
मुर्दा हैं तो उनके साथ मुर्दों जैसा सलूक क्यूँ नहीं….
क्यूँ मुर्दे की पहचान सिर्फ प्राण जाने से है….
क्यूँ…..

2.

ढो रहे थे काँधे पे रो रहे थे सभी….
लाश उसकी ज़िंदा रहा था जो कभी…
थे संगी सखा कुछ बचपन के..
रिश्ते में…घर के लोग..रो रहे सभी…

प्राण गए तो मर गया ज़िंदा था जो अभी अभी…
ज़िंदा था तो रिश्ता था मुर्दा है तो कुछ नहीं…
है मुर्दे की पहचान यही भाव जिसमें नहीं कोई…
घर…समाज…धर्म…क़ानून सब पराये हो जाते हैं…
घर में रहने की इजाज़त नहीं…शमशान ले जाते हैं…

मुर्दे की है पहचान यही….
ज़िंदा हैं तो भाव हैं…मर गया कोई सुख दुःख नहीं…
मुर्दे की पहचान यही….

बीच चौराहे पे हुआ क़त्ल सब ने देखा पर नहीं असर…
कोख में बच्ची क़त्ल, दिल किसी में रहम नहीं…
तार तार हुई अस्मत, दिन दहाड़े एक नारी की…
चीत्कार सुनी अनसुनी रही दिल में दर्द की कमी रही…
पत्थर दिल बन रह गए सभी, आँखों में थी नमी नहीं…
शमशान बना है जब सारा शहर जिसमें मुर्दों की कमी नहीं…
फिर क्यूँ मुर्दा है सिर्फ वही जिसके प्राण बचे नहीं….
क्या मुर्दे की पहचान यही….
\
/सी. एम्. शर्मा

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 756 Views

Books from CM Sharma

You may also like:
"ख़्वाहिशों की दुनिया"
Dr. Kishan tandon kranti
कवि कर्म
कवि कर्म
दशरथ रांकावत 'शक्ति'
वैलेंटाइन डे युवाओं का एक दिवालियापन
वैलेंटाइन डे युवाओं का एक दिवालियापन
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
किरदार
किरदार
SAGAR
जीवन की सांझ
जीवन की सांझ
Dr. Girish Chandra Agarwal
2236.
2236.
Khedu Bharti "Satyesh"
★तक़दीर ★
★तक़दीर ★
★ IPS KAMAL THAKUR ★
एक जिंदगी एक है जीवन
एक जिंदगी एक है जीवन
विजय कुमार अग्रवाल
मोक्षदायिनी उज्जैयिनी जहां शिवमय है कण कण
मोक्षदायिनी उज्जैयिनी जहां शिवमय है कण कण
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
दूर तलक कोई नजर नहीं आया
दूर तलक कोई नजर नहीं आया
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
दर्द ए हया को दर्द से संभाला जाएगा
दर्द ए हया को दर्द से संभाला जाएगा
कवि दीपक बवेजा
सही दिशा में
सही दिशा में
Ratan Kirtaniya
Education
Education
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
"आँखों में लाल-लाल,
*Author प्रणय प्रभात*
*जाड़ा मनाने का (हिंदी गजल/गीतिका)*
*जाड़ा मनाने का (हिंदी गजल/गीतिका)*
Ravi Prakash
" रुढ़िवादिता की सोच"
Dr Meenu Poonia
बड़े दिनों के बाद मिले हो
बड़े दिनों के बाद मिले हो
Surinder blackpen
✍️वक़्त आने पर ✍️
✍️वक़्त आने पर ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
तुम इतना सिला देना।
तुम इतना सिला देना।
Taj Mohammad
💐अज्ञात के प्रति-32💐
💐अज्ञात के प्रति-32💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
✍️दिल चाहता...
✍️दिल चाहता...
'अशांत' शेखर
यह तेरा चेहरा हसीन
यह तेरा चेहरा हसीन
gurudeenverma198
दिसंबर
दिसंबर
बिमल तिवारी “आत्मबोध”
दिला दअ हो अजदिया
दिला दअ हो अजदिया
Shekhar Chandra Mitra
शेर
शेर
Rajiv Vishal
कितनी खास हो तुम
कितनी खास हो तुम
सोनम राय
मेरे हृदय में तुम
मेरे हृदय में तुम
Kavita Chouhan
Writing Challenge- नायक (Hero)
Writing Challenge- नायक (Hero)
Sahityapedia
बुंदेली दोहा
बुंदेली दोहा
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
भलाई में सबकी अपना भला है।
भलाई में सबकी अपना भला है।
Dr fauzia Naseem shad
Loading...