Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Mar 2017 · 1 min read

???? मुक्तक????

जवाब नहीं उनका भी,वो लाजवाब हो गये
कल तक जो पाक साफ थे,आज नापाक हो गये
मुझे मयखाने की किस्मत पर हँसी आती है
जहाँ पानी भी जाकर,देखो शराब हो गये |

डा. पूनम गर्ग

Language: Hindi
1 Like · 294 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
उम्र बढती रही दोस्त कम होते रहे।
उम्र बढती रही दोस्त कम होते रहे।
Sonu sugandh
रिश्ते
रिश्ते
Sanjay ' शून्य'
चमकते तारों में हमने आपको,
चमकते तारों में हमने आपको,
Ashu Sharma
किसने क्या खूबसूरत लिखा है
किसने क्या खूबसूरत लिखा है
शेखर सिंह
अगर लोग आपको rude समझते हैं तो समझने दें
अगर लोग आपको rude समझते हैं तो समझने दें
ruby kumari
2933.*पूर्णिका*
2933.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Emerging Water Scarcity Problem in Urban Areas
Emerging Water Scarcity Problem in Urban Areas
Shyam Sundar Subramanian
#बन_जाओ_नेता
#बन_जाओ_नेता
*प्रणय प्रभात*
मनहरण घनाक्षरी
मनहरण घनाक्षरी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
यह दुनिया समझती है, मै बहुत गरीब हुँ।
यह दुनिया समझती है, मै बहुत गरीब हुँ।
Anil chobisa
घर वापसी
घर वापसी
Aman Sinha
कलयुगी धृतराष्ट्र
कलयुगी धृतराष्ट्र
Dr Parveen Thakur
प्रेमचंद के उपन्यासों में दलित विमर्श / MUSAFIR BAITHA
प्रेमचंद के उपन्यासों में दलित विमर्श / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
*Near Not Afar*
*Near Not Afar*
Poonam Matia
जनता का पैसा खा रहा मंहगाई
जनता का पैसा खा रहा मंहगाई
नेताम आर सी
विचारों को पढ़ कर छोड़ देने से जीवन मे कोई बदलाव नही आता क्य
विचारों को पढ़ कर छोड़ देने से जीवन मे कोई बदलाव नही आता क्य
Rituraj shivem verma
अपार ज्ञान का समंदर है
अपार ज्ञान का समंदर है "शंकर"
Praveen Sain
चुनिंदा अश'आर
चुनिंदा अश'आर
Dr fauzia Naseem shad
राष्ट्र निर्माण के नौ दोहे
राष्ट्र निर्माण के नौ दोहे
Ravi Prakash
पुनर्जागरण काल
पुनर्जागरण काल
Dr.Pratibha Prakash
खुशनसीब
खुशनसीब
Bodhisatva kastooriya
आदमी के हालात कहां किसी के बस में होते हैं ।
आदमी के हालात कहां किसी के बस में होते हैं ।
sushil sarna
क़िताबों में दफ़न है हसरत-ए-दिल के ख़्वाब मेरे,
क़िताबों में दफ़न है हसरत-ए-दिल के ख़्वाब मेरे,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
अखंड भारत
अखंड भारत
विजय कुमार अग्रवाल
फ़ितरत को ज़माने की, ये क्या हो गया है
फ़ितरत को ज़माने की, ये क्या हो गया है
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मुक्तक
मुक्तक
पंकज कुमार कर्ण
"चलना और रुकना"
Dr. Kishan tandon kranti
अनेकों पंथ लोगों के, अनेकों धाम हैं सबके।
अनेकों पंथ लोगों के, अनेकों धाम हैं सबके।
जगदीश शर्मा सहज
वस्तु काल्पनिक छोड़कर,
वस्तु काल्पनिक छोड़कर,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
अनंतनाग में शहीद हुए
अनंतनाग में शहीद हुए
Harminder Kaur
Loading...