Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Feb 2017 · 1 min read

***** मिट्टी के घरोंदे सा *****

मिट्टी के घरोंदे सा हमारा दिल है
जरा सी ठेस लगते ही टूट जाता है ।

मकां तो फिर भी बना लिए जाते हैं
टूटा हुआ दिल फिर बनाने से नहीं बनता है ।

इस दिल को सम्भालकर रखो
ये कहीँ फिसल ना जाये …

फर्स पक्का हो किसी के ह्रदय का तो टूटने का डर है …
.
दिल लगाओ उसी से
जिसके ह्रदय का आँगन
बालू रेत से बना हो ताकि
गिर कर भी सम्भलजाये ..

दिल फिसले तो भी
साबुत नजर आये …
कोई खरोंच उसपे ना आये …
दिल अपना अपना ही होकर रहें ….
..?मधुप बैरागी

Language: Hindi
1 Like · 437 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from भूरचन्द जयपाल
View all
You may also like:
‘पितृ देवो भव’ कि स्मृति में दो शब्द.............
‘पितृ देवो भव’ कि स्मृति में दो शब्द.............
Awadhesh Kumar Singh
बचपन की यादें
बचपन की यादें
Neeraj Agarwal
कभी मज़बूरियों से हार दिल कमज़ोर मत करना
कभी मज़बूरियों से हार दिल कमज़ोर मत करना
आर.एस. 'प्रीतम'
जीवन चक्र में_ पढ़ाव कई आते है।
जीवन चक्र में_ पढ़ाव कई आते है।
Rajesh vyas
तुझसें में क्या उम्मीद करू कोई ,ऐ खुदा
तुझसें में क्या उम्मीद करू कोई ,ऐ खुदा
Sonu sugandh
तुम बहुत प्यारे हो
तुम बहुत प्यारे हो
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
यादें
यादें
Versha Varshney
नेहा सिंह राठौर
नेहा सिंह राठौर
Shekhar Chandra Mitra
हर मानव खाली हाथ ही यहाँ आता है,
हर मानव खाली हाथ ही यहाँ आता है,
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
फागुनी धूप, बसंती झोंके
फागुनी धूप, बसंती झोंके
Shweta Soni
प्रदूषण-जमघट।
प्रदूषण-जमघट।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
लोगों को सफलता मिलने पर खुशी मनाना जितना महत्वपूर्ण लगता है,
लोगों को सफलता मिलने पर खुशी मनाना जितना महत्वपूर्ण लगता है,
Paras Nath Jha
नीम
नीम
Dr. Pradeep Kumar Sharma
जिंदगी हमने जी कब,
जिंदगी हमने जी कब,
Umender kumar
ना रहीम मानता हूँ मैं, ना ही राम मानता हूँ
ना रहीम मानता हूँ मैं, ना ही राम मानता हूँ
VINOD CHAUHAN
अंधा बांटे रेबड़ी, फिर फिर अपनों के देवे – कहावत/ DR. MUSAFIR BAITHA
अंधा बांटे रेबड़ी, फिर फिर अपनों के देवे – कहावत/ DR. MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
मेरे भोले भण्डारी
मेरे भोले भण्डारी
Dr. Upasana Pandey
कोई भी इतना व्यस्त नहीं होता कि उसके पास वह सब करने के लिए प
कोई भी इतना व्यस्त नहीं होता कि उसके पास वह सब करने के लिए प
पूर्वार्थ
तेरे जाने के बाद ....
तेरे जाने के बाद ....
ओनिका सेतिया 'अनु '
मंदिर बनगो रे
मंदिर बनगो रे
Sandeep Pande
अजनबी सा लगता है मुझे अब हर एक शहर
अजनबी सा लगता है मुझे अब हर एक शहर
'अशांत' शेखर
सुना है सपनों की हाट लगी है , चलो कोई उम्मीद खरीदें,
सुना है सपनों की हाट लगी है , चलो कोई उम्मीद खरीदें,
Manju sagar
सच और झूँठ
सच और झूँठ
विजय कुमार अग्रवाल
दिन को रात और रात को दिन बना देंगे।
दिन को रात और रात को दिन बना देंगे।
Phool gufran
■ वही हालात बेढंगे जो पहले थे वो अब भी हैं।
■ वही हालात बेढंगे जो पहले थे वो अब भी हैं।
*Author प्रणय प्रभात*
मेरे खतों को अगर,तुम भी पढ़ लेते
मेरे खतों को अगर,तुम भी पढ़ लेते
gurudeenverma198
*बड़ मावसयह कह रहा ,बरगद वृक्ष महान ( कुंडलिया )*
*बड़ मावसयह कह रहा ,बरगद वृक्ष महान ( कुंडलिया )*
Ravi Prakash
हुस्न और खूबसूरती से भरे हुए बाजार मिलेंगे
हुस्न और खूबसूरती से भरे हुए बाजार मिलेंगे
शेखर सिंह
" जुदाई "
Aarti sirsat
मुझको बे'चैनियाँ जगा बैठी
मुझको बे'चैनियाँ जगा बैठी
Dr fauzia Naseem shad
Loading...