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मां तो मां होती है ( मातृ दिवस पर विशेष)

मां तो मां होती है ,
चाहे इंसान हो या जानवर ।
जन्म देकर लालन पालन करे ,
देखभाल करे वोह निरंतर.

हां ! अंदाज अलग अलग हो सकता है ,
मगर होता तो आंखों से जाहिर है ।
कोई स्नेह से गले लगाए ,हाथ फेरे सिर पर,
तो कोई जुबान से ,प्यार तो प्यार है ।

फिक्र जितनी मनुष्य मां को होती ,
क्या पशु मां को नहीं होती होगी ।
दूर हो संतान तो बेचैन रहती हर पल ,
क्या वोह चैन से है सो पाती ?

मनुष्य मां देती अपनी संतान को ,
संस्कार ,अनुशासन और मनुष्यता और शिक्षा दीक्षा।
तो पशु पक्षियों में भी मां सिखाती ,
आत्म निर्भर बनना, और लेती कठिन परीक्षा ।

दर्द तो दोनो को होता है ना जन्म देने पर ,
वोह अलग बात है एक कराह सकती है ।
और दूजी बेजुबान सहती खामोशी से,
मगर प्रथम स्पर्श पाकर सब भूल जाती है ।

मनुष्य मां की संतान यदि कोई छीन ले,
मृत्यु या शैतान कोई ।
तड़प उठती है रोती है बिलखती है ,
पीड़ा में तो फर्क नहीं कोई ।

ममता तो सार्वभौम और विश्व व्यापी भावना है ,
इसमें न कोई भेद है यह शाश्वत है ।
मनुष्य मात्र की ही नही ,यह सारी प्रकृति की ,
और धरती माता की भी आत्मा है ।

अतः मां चाहे कोई भी हो ,
उसका आदर करो ।
उसकी पवित्र भावनाओं का ,
सम्मान करो ।

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