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18 Jan 2024 · 1 min read

मन की पीड़ा

मन की पीड़ा
मन के भीतर
मूक सी है
कैसी जीवन में
जीवन की
भूख सी है
कोमल मन में
भाव समाहित
ह्रदय में खिली
कोई धूप सी है
रिश्तों में विफलता
सम्बन्धों की चूक सी है।

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