Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Dec 2022 · 1 min read

*** ” मनोवृत्ति…!!! ***

” जरा सा मन बहकता है मेरा..
बस चले आता हूँ मैं यहाँ…!
कुछ ख़्वाब-ख़्यालों से मेरा..
बस मन संवर जाता है यहाँ…!
इरादा है कुछ..
बहुत दूर तक चले जाने का…!
मस्ती भरे मौसम में..
कुछ घुल-मिल बिसर जाने का…!
पर..
ये ठहराव है कि…
जो जकड़ लेता है कस के मुझे…!
कुछ राग अपनों के सपनों की..
अपनों में समेट लेता है मुझे…!
थोड़ा थक सा जाता हूँ अब मैं..
कुछ यक़ीन करो…
इसलिए दूर निकलना छोड़ दिया है…!
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि अब..
मैंने पूरा चलना ही छोड़ दिया है…!
मसला ये है कि..
हम वाक़िफ है…
ये फासले अक्स़र रिश्तों में.. ,
कुछ अजीब-सी दूरियाँ बढ़ा देते हैं…!
पर..
ऐसा भी नहीं है कि अब…
मैंने अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है…! ”

*****************∆∆∆****************

* बी पी पटेल *
बिलासपुर (छ.ग.)
११ / १२ /२०२२

Language: Hindi
215 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दोहे-
दोहे-
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
3190.*पूर्णिका*
3190.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सच्ची होली
सच्ची होली
Mukesh Kumar Rishi Verma
इश्क
इश्क
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
हमने अपना भरम
हमने अपना भरम
Dr fauzia Naseem shad
अनेक को दिया उजाड़
अनेक को दिया उजाड़
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दिल की बात बताऊँ कैसे
दिल की बात बताऊँ कैसे
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
मैंने फत्ते से कहा
मैंने फत्ते से कहा
Satish Srijan
गुजरते लम्हों से कुछ पल तुम्हारे लिए चुरा लिए हमने,
गुजरते लम्हों से कुछ पल तुम्हारे लिए चुरा लिए हमने,
Hanuman Ramawat
बेशक़ कमियाँ मुझमें निकाल
बेशक़ कमियाँ मुझमें निकाल
सिद्धार्थ गोरखपुरी
अकिंचित ,असहाय और निरीह को सहानभूति की आवश्यकता होती है पर अ
अकिंचित ,असहाय और निरीह को सहानभूति की आवश्यकता होती है पर अ
DrLakshman Jha Parimal
न जाने कहा‌ँ दोस्तों की महफीले‌ं खो गई ।
न जाने कहा‌ँ दोस्तों की महफीले‌ं खो गई ।
Yogendra Chaturwedi
-- क्लेश तब और अब -
-- क्लेश तब और अब -
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
फितरत अमिट जन एक गहना🌷🌷
फितरत अमिट जन एक गहना🌷🌷
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
विकास का ढिंढोरा पीटने वाले ,
विकास का ढिंढोरा पीटने वाले ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
*करता है मस्तिष्क ही, जग में सारे काम (कुंडलिया)*
*करता है मस्तिष्क ही, जग में सारे काम (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
अर्ज किया है जनाब
अर्ज किया है जनाब
शेखर सिंह
"मुद्रा"
Dr. Kishan tandon kranti
*
*"ममता"* पार्ट-2
Radhakishan R. Mundhra
गीत गाऊ
गीत गाऊ
Kushal Patel
इस बार मुकाबला दो झुंडों के बीच है। एक के सारे चेहरे एक मुखौ
इस बार मुकाबला दो झुंडों के बीच है। एक के सारे चेहरे एक मुखौ
*Author प्रणय प्रभात*
जो हार नहीं मानते कभी, जो होते कभी हताश नहीं
जो हार नहीं मानते कभी, जो होते कभी हताश नहीं
महेश चन्द्र त्रिपाठी
कितना सुकून और कितनी राहत, देता माँ का आँचल।
कितना सुकून और कितनी राहत, देता माँ का आँचल।
डॉ.सीमा अग्रवाल
कांग्रेस की आत्महत्या
कांग्रेस की आत्महत्या
Sanjay ' शून्य'
संकट मोचन हनुमान जी
संकट मोचन हनुमान जी
Neeraj Agarwal
मुझे पता है।
मुझे पता है।
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
नफ़्स
नफ़्स
निकेश कुमार ठाकुर
गजल सगीर
गजल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
संवेदनाओं का भव्य संसार
संवेदनाओं का भव्य संसार
Ritu Asooja
Dr Arun Kumar shastri
Dr Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Loading...