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28 Feb 2017 · 1 min read

मधुमास में

इस बार

मधुमास में
फिर खेलेंगे
होली हम
तेरी यादो संग
मोतियों से भी
बेशकीमती
शबनमी
अश्रु जल में
घुले होंगे
अनेको अनूठे रंग
कुछ प्रेम के,
कुछ क्रोध के
नाराजगी संग,
कुछ अनबन के
हास परिहास
संग उपहास के
शायद धुंधला जाये
ह्रदय पर लगी
उस छाप को
जो आज तक दमकती है
सुनहरे रंग में
और महका जाती है
मेरे तन बदन को
अपने बासंती
मधुमास से !

!

!

—:: डी के निवातिया ::—

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 688 Views

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