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8 Feb 2017 · 1 min read

बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते

बड़ी तकलीफ़ देते हैं ये रिश्ते
यही उपहार देते रोज़ अपने

ज़मीं से आस्मां तक फ़ैल जाएँ
धनक में ख़्वाहिशों के रंग बिखरे

नहीं टूटे कभी जो मुश्किलों से
बहुत ख़ुद्दार हमने लोग देखे

ये कड़वा सच है यारों मुफ़लिसी का
यहाँ हर आँख में हैं टूटे सपने

कहाँ ले जायेगा मुझको ज़माना
बड़ी उलझन है, कोई हल तो निकले

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