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31 Jul 2016 · 1 min read

बड़ा हाथ (लघु कथा)

बड़ा हाथ
*******

.….आइये बाबू जी आइये। ये लीजिये सवा पांच रुपये का प्रसाद पैक करके रखा है आपके लिए। आपको दूर से ही देख लिया था ना ! इसलिए पहले ही पैक करके रख दिया ! मन्दिर के सामने लगे प्रसाद के खुमचे पर बैठी महिला ने उससे कहा ।

…..अरे आज सवा पांच का नहीं … एक सौ इक्यावन का प्रसाद पैक कर दो .. ये लो दो सौ रुपये।

…..अच्छी बात बाबू जी। ये लीजिये बाँकी के पैसे।

…..अरे रहने दो ! तुम रख लो।

…. लगता है बाबू जी ने आज कहीं बड़ा हाथ मार लिया है। जुग–जुग जियो बाबू जी।
भगवान आपको रोज बड़ा हाथ मारने का मौक़ा दे।

…. और बाबू जी प्रसाद लेकर मुस्कुराते हुए मंदिर की तरफ बढ़ गये.

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हरीश चन्द्र लोहुमी
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Language: Hindi
Tag: कविता
2 Comments · 362 Views
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