Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Aug 16, 2016 · 1 min read

बैठ कर ज़ख़्म ही गिना कीजे ‘

हालत ऐ हिज्र है तो क्या कीजे
बैठ कर ज़ख़्म ही गिना कीजे ‘

आग तो ख़ैर क्या बुझेगी अब
आप तो बस इसे हवा कीजे ‘

जब ज़ुबाँ है तो खोलिये इसको
ऐसे खामोश मत रहा कीजे ‘

इश्क़ हो और उस तरफ भी हो
इक तरफ हो तो कोई क्या कीजे

कैसे कैसे कलाम पढ़ते हो
दो भी मिसरों में कुछ कहा कीजे

है मज़ा रूठने मनाने मैं
मुस्तकिल उससे क्यूँ वफा कीजे

दोस्ती खूब किजिये सबसे
दुशमनी का भी हक़ अदा कीजे

चारागर ने कहा है अबकी बार
अपने हक़ मेें फकत दुआ कीजे

– नासिर राव

1 Comment · 223 Views
You may also like:
ख़्वाब आंखों के
Dr fauzia Naseem shad
यादों की बारिश का कोई
Dr fauzia Naseem shad
चलो दूर चलें
VINOD KUMAR CHAUHAN
तपों की बारिश (समसामयिक नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
स्वर कटुक हैं / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
✍️आशिकों के मेले है ✍️
Vaishnavi Gupta
मिट्टी की कीमत
निकेश कुमार ठाकुर
ख़्वाहिश पर लिखे अशआर
Dr fauzia Naseem shad
आसान नहीं होता है पिता बन पाना
Poetry By Satendra
कोई मंझधार में पड़ा हैं
VINOD KUMAR CHAUHAN
ऐसे थे पापा मेरे !
Kuldeep mishra (KD)
प्यार
Anamika Singh
उनकी यादें
Ram Krishan Rastogi
✍️बारिश का मज़ा ✍️
Vaishnavi Gupta
गंगा दशहरा
श्री रमण 'श्रीपद्'
मेरे पिता
Ram Krishan Rastogi
फहराये तिरंगा ।
Buddha Prakash
【34】*!!* आग दबाये मत रखिये *!!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
# पिता ...
Chinta netam " मन "
.....उनके लिए मैं कितना लिखूं?
ऋचा त्रिपाठी
एक पनिहारिन की वेदना
Ram Krishan Rastogi
साधु न भूखा जाय
श्री रमण 'श्रीपद्'
मैं हिन्दी हूँ , मैं हिन्दी हूँ / (हिन्दी दिवस...
ईश्वर दयाल गोस्वामी
श्रीराम
सुरेखा कादियान 'सृजना'
पिता का सपना
Prabhudayal Raniwal
जितनी मीठी ज़ुबान रक्खेंगे
Dr fauzia Naseem shad
सच्चे मित्र की पहचान
Ram Krishan Rastogi
पिता - जीवन का आधार
आनन्द कुमार
*"पिता"*
Shashi kala vyas
मोर के मुकुट वारो
शेख़ जाफ़र खान
Loading...