Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Jan 2017 · 1 min read

बेटियाँ

“बेटियाँ”
आती है कोख में,अनजाना रिश्ता बन,
मोह लेती है आकर,जहाँ में सबका मन।

देख चहरे को इसके,सब हुआ खिला,
जाते हर गीला-शिकवा,मन से भूला।

जुड़ जाते हैं दिल के तार,उससे बेशुमार,
वही माँ-पापा हम,जो देते असीमित प्यार।

पायल की छन-छन से,आँगन गूँजता है,
उसके आने की खुशबू से,घर महकता है।

दूर रह जो पास होने का,अहसास देती है,
मुश्किल क्षण में साथ खड़ी,पास होती है।

ऐसी होती है खून से सिंची,हमारी परियाँ,
जिस घर भी जन्मी ये कली,कहते बेटियाँ।
……………………..

Language: Hindi
450 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
भारत माँ के वीर सपूत
भारत माँ के वीर सपूत
Kanchan Khanna
*अगवा कर लिया है सूरज को बादलों ने...,*
*अगवा कर लिया है सूरज को बादलों ने...,*
AVINASH (Avi...) MEHRA
23/05.छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
23/05.छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
पलटूराम में भी राम है
पलटूराम में भी राम है
Sanjay ' शून्य'
पितर पाख
पितर पाख
Mukesh Kumar Sonkar
आँख खुलते ही हमे उसकी सख़्त ज़रूरत होती है
आँख खुलते ही हमे उसकी सख़्त ज़रूरत होती है
KAJAL NAGAR
तेरे लहजे पर यह कोरी किताब कुछ तो है |
तेरे लहजे पर यह कोरी किताब कुछ तो है |
कवि दीपक बवेजा
आजाद पंछी
आजाद पंछी
Ritu Asooja
फ़ितरतन
फ़ितरतन
Monika Verma
जीवनमंथन
जीवनमंथन
Shyam Sundar Subramanian
तौबा ! कैसा यह रिवाज
तौबा ! कैसा यह रिवाज
ओनिका सेतिया 'अनु '
काव्य_दोष_(जिनको_दोहा_छंद_में_प्रमुखता_से_दूर_रखने_ का_ प्रयास_करना_चाहिए)*
काव्य_दोष_(जिनको_दोहा_छंद_में_प्रमुखता_से_दूर_रखने_ का_ प्रयास_करना_चाहिए)*
Subhash Singhai
फागुन कि फुहार रफ्ता रफ्ता
फागुन कि फुहार रफ्ता रफ्ता
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
कदम छोटे हो या बड़े रुकना नहीं चाहिए क्योंकि मंजिल पाने के ल
कदम छोटे हो या बड़े रुकना नहीं चाहिए क्योंकि मंजिल पाने के ल
Swati
#लघुकथा / #एकता
#लघुकथा / #एकता
*Author प्रणय प्रभात*
कुछ यथार्थ कुछ कल्पना कुछ अरूप कुछ रूप।
कुछ यथार्थ कुछ कल्पना कुछ अरूप कुछ रूप।
Mahendra Narayan
"सुप्रभात"
Yogendra Chaturwedi
कविता
कविता
sushil sarna
दिल में
दिल में
Dr fauzia Naseem shad
एक ही तारनहारा
एक ही तारनहारा
Satish Srijan
मायके से लौटा मन
मायके से लौटा मन
Shweta Soni
हम तो फूलो की तरह अपनी आदत से बेबस है.
हम तो फूलो की तरह अपनी आदत से बेबस है.
शेखर सिंह
एक शख्स
एक शख्स
Pratibha Pandey
शे'र
शे'र
Anis Shah
रिश्ते-नाते गौण हैं, अर्थ खोय परिवार
रिश्ते-नाते गौण हैं, अर्थ खोय परिवार
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
"खामोशी"
Dr. Kishan tandon kranti
ठुकरा दिया है 'कल' ने आज मुझको
ठुकरा दिया है 'कल' ने आज मुझको
सिद्धार्थ गोरखपुरी
जिस्म से जान जैसे जुदा हो रही है...
जिस्म से जान जैसे जुदा हो रही है...
Sunil Suman
💐प्रेम कौतुक-484💐
💐प्रेम कौतुक-484💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
इंसानियत
इंसानियत
साहित्य गौरव
Loading...