Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Mar 2023 · 1 min read

बुद्ध जग में पार लगा दो ।

भटक रहा हूँ तेरे खातिर,
मन में ज्ञान दीप जलाने को,
सरण में तेरे आया हूँ,
बुद्ध जग में पार लगा दो ।….(१)

शांति दूत तुम चीवर धा,
प्रेम की करुणा बरसा दो,
आ गये है तेरे दर्शन को,
बुद्ध जग में पार लगा दो।….(२)

दुःख है जीवन में सबके,
दुःख मुक्ति का मार्ग बता दो,
पाया तेरा धम्म यहाँ,
बुद्ध जग से पार लगा दो।….(३)

रचनाकार-
बुद्ध प्रकाश,
मौदहा हमीरपुर।

3 Likes · 1 Comment · 294 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Buddha Prakash
View all
You may also like:
अपूर्ण प्रश्न
अपूर्ण प्रश्न
Shyam Sundar Subramanian
*गाता गाथा राम की, तीर्थ अयोध्या धाम (कुंडलिया)*
*गाता गाथा राम की, तीर्थ अयोध्या धाम (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
शादी की उम्र नहीं यह इनकी
शादी की उम्र नहीं यह इनकी
gurudeenverma198
मुद्दतों बाद खुद की बात अपने दिल से की है
मुद्दतों बाद खुद की बात अपने दिल से की है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मौत का रंग लाल है,
मौत का रंग लाल है,
पूर्वार्थ
किस्मत की लकीरें
किस्मत की लकीरें
Dr Parveen Thakur
मेहनत और अभ्यास
मेहनत और अभ्यास
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
"सुप्रभात "
Yogendra Chaturwedi
💐अज्ञात के प्रति-36💐
💐अज्ञात के प्रति-36💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
दो शे'र
दो शे'र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
■सियासी फार्मूला■
■सियासी फार्मूला■
*Author प्रणय प्रभात*
मेल
मेल
Lalit Singh thakur
रिश्ते सम्भालन् राखियो, रिश्तें काँची डोर समान।
रिश्ते सम्भालन् राखियो, रिश्तें काँची डोर समान।
Anil chobisa
वो अनुराग अनमोल एहसास
वो अनुराग अनमोल एहसास
Seema gupta,Alwar
अलमस्त रश्मियां
अलमस्त रश्मियां
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
अगर मुझे तड़पाना,
अगर मुझे तड़पाना,
Dr. Man Mohan Krishna
जीना है तो ज़माने के रंग में रंगना पड़ेगा,
जीना है तो ज़माने के रंग में रंगना पड़ेगा,
_सुलेखा.
कोई पत्ता कब खुशी से अपनी पेड़ से अलग हुआ है
कोई पत्ता कब खुशी से अपनी पेड़ से अलग हुआ है
कवि दीपक बवेजा
शेष कुछ
शेष कुछ
Dr.Priya Soni Khare
‘1857 के विद्रोह’ की नायिका रानी लक्ष्मीबाई
‘1857 के विद्रोह’ की नायिका रानी लक्ष्मीबाई
कवि रमेशराज
सांच कह्यां सुख होयस्यी,सांच समद को सीप।
सांच कह्यां सुख होयस्यी,सांच समद को सीप।
विमला महरिया मौज
23/164.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/164.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आशिकी
आशिकी
साहिल
तपते सूरज से यारी है,
तपते सूरज से यारी है,
Satish Srijan
"हकीकत"
Dr. Kishan tandon kranti
उसने मुझको बुलाया तो जाना पड़ा।
उसने मुझको बुलाया तो जाना पड़ा।
सत्य कुमार प्रेमी
आंधी
आंधी
Aman Sinha
गुरु दीक्षा
गुरु दीक्षा
GOVIND UIKEY
शक्कर में ही घोलिए,
शक्कर में ही घोलिए,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
अनेकों पंथ लोगों के, अनेकों धाम हैं सबके।
अनेकों पंथ लोगों के, अनेकों धाम हैं सबके।
जगदीश शर्मा सहज
Loading...