Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
28 Jan 2024 · 1 min read

बाल कविता: मदारी का खेल

बाल कविता: मदारी का खेल
***********************

देखो बच्चों मदारी आया,
साथ मे बंदर भालू लाया।

बंदर को पसंद है केला,
लोगो का लगा है मेला।

भालू नाचे छम छम छम,
डमरू बाजे डम डम डम।

जोकर बंदर पहनकर टोपी,
छलांग लगाये ऊँची ऊँची।

दोनों ने दिखाया खेल,
पैसों की हो गयी रेलमपेल।

*********📚*********
स्वरचित कविता 📝
✍️रचनाकार:
राजेश कुमार अर्जुन

3 Likes · 5 Comments · 126 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*सावन में अब की बार
*सावन में अब की बार
Poonam Matia
आया सखी बसंत...!
आया सखी बसंत...!
Neelam Sharma
ढोंगी बाबा
ढोंगी बाबा
Kanchan Khanna
हाथ की उंगली😭
हाथ की उंगली😭
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
"सुप्रभात"
Yogendra Chaturwedi
दीपावली
दीपावली
Neeraj Agarwal
Stop chasing people who are fine with losing you.
Stop chasing people who are fine with losing you.
पूर्वार्थ
*खरगोश (बाल कविता)*
*खरगोश (बाल कविता)*
Ravi Prakash
!! ख़ुद को खूब निरेख !!
!! ख़ुद को खूब निरेख !!
Chunnu Lal Gupta
कोई भी जंग अंग से नही बल्कि हौसले और उमंग से जीती जाती है।
कोई भी जंग अंग से नही बल्कि हौसले और उमंग से जीती जाती है।
Rj Anand Prajapati
!..............!
!..............!
शेखर सिंह
चाय ही पी लेते हैं
चाय ही पी लेते हैं
Ghanshyam Poddar
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा हिंदुस्तान
सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा हिंदुस्तान
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
स्त्री एक देवी है, शक्ति का प्रतीक,
स्त्री एक देवी है, शक्ति का प्रतीक,
कार्तिक नितिन शर्मा
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
ख्वाब हो गए हैं वो दिन
shabina. Naaz
चित्रगुप्त सत देव को,करिए सभी प्रणाम।
चित्रगुप्त सत देव को,करिए सभी प्रणाम।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
वक़्त
वक़्त
विजय कुमार अग्रवाल
Tu wakt hai ya koi khab mera
Tu wakt hai ya koi khab mera
Sakshi Tripathi
प्यार/प्रेम की कोई एकमत परिभाषा कतई नहीं हो सकती।
प्यार/प्रेम की कोई एकमत परिभाषा कतई नहीं हो सकती।
Dr MusafiR BaithA
ओ अच्छा मुस्कराती है वो फिर से रोने के बाद /लवकुश यादव
ओ अच्छा मुस्कराती है वो फिर से रोने के बाद /लवकुश यादव "अज़ल"
लवकुश यादव "अज़ल"
*खड़ी हूँ अभी उसी की गली*
*खड़ी हूँ अभी उसी की गली*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
नर से नर पिशाच की यात्रा
नर से नर पिशाच की यात्रा
Sanjay ' शून्य'
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
हिन्दी दोहा बिषय- न्याय
हिन्दी दोहा बिषय- न्याय
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
इस टूटे हुए दिल को जोड़ने की   कोशिश मत करना
इस टूटे हुए दिल को जोड़ने की कोशिश मत करना
Anand.sharma
आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए
आप तो गुलाब है,कभी बबूल न बनिए
Ram Krishan Rastogi
2723.*पूर्णिका*
2723.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कड़वा बोलने वालो से सहद नहीं बिकता
कड़वा बोलने वालो से सहद नहीं बिकता
Ranjeet kumar patre
" आशा "
Dr. Kishan tandon kranti
पिता
पिता
sushil sarna
Loading...