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7 Feb 2024 · 1 min read

बात तो कद्र करने की है

बात तो कद्र करने की , कद्र होने की है।
किसी को पाने‌‌ की ,किसी को खोने की है

क्यों चिल्ला चिल्ला कर लेते हो नाम मेरा
बात तो मेरे होने‌ या न होने की है ।

ख्वाब तेरे टहलते हैं ,दिल की‌ मुंडेर पर
बात आंख लगने या मेरे सोने की‌ है।

क्यों बार-बार गरजते हैं मेघ की तरह
बात बदन की नहीं ,आंख भिगोने की है।

कितनी दूरियां बढ़ जाती है साथ साथ चलते
बात तो साथ हो कर भी ,साथ न होने की हैं

सुरिंदर कौर

Language: Hindi
94 Views
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