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9 Feb 2024 · 1 min read

बात जुबां से अब कौन निकाले

पल पल बढ़ती उम्र सी हसरत
यही तो दुख का बीज है हजरत

दिल मे सबके छ्प जाने की चाहत
कर दे खुद से जुदा होने सी हालत

बैठे कब तक रहे यूं मुस्कान चिपकाए
दिल की आवाज कब दिल को दे सुनाए

जमी पकडे है पैर जकड कर
नज़र तलाश रही ऊंचा जंहा
कि हाथ मचलते है परो से
बस पा ले मुठ्ठी भर आसमान

शिकवा अब ना कोई शिकायत
प्यार बिना यह है बस हिमाकत

जाने दूर का जो ख्वाब हो पाले
मुझसे बेहतर तुम्हे कौन संभाले

कहा है दिल से एक दिल ही सुनले
बात जुबां से अब कौन निकाले

संदीप पांडे”शिष्य” अजमेर

Language: Hindi
3 Likes · 64 Views
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