Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Aug 2023 · 1 min read

बाढ़ का आतंक

** रूप घनाक्षरी **
~~
बाढ़ का आतंक जब छा रहा सभी जगह,
सबको डरा रहा है खूब बारिशों का शोर।
फटते ही जा रहे हैं बादल अनेक जब,
चलता नहीं है यहां आदमी का कोई जोर।
भौतिक विकास का है क्रम देखिए प्रबल।
बेवजह दिया स्वयं प्रकृति को झकझोर।
मूल्य हम चुका रहे छेड़छाड़ के वीभत्स,
देखने हमें है नित्य आफतों के चक्र घोर।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
-सुरेन्द्रपाल वैद्य, मण्डी (हि.प्र.)

1 Like · 262 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from surenderpal vaidya
View all
You may also like:
सफलता का लक्ष्य
सफलता का लक्ष्य
Paras Nath Jha
सरोकार
सरोकार
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
बादलों की उदासी
बादलों की उदासी
Shweta Soni
मैं कौन हूँ?मेरा कौन है ?सोच तो मेरे भाई.....
मैं कौन हूँ?मेरा कौन है ?सोच तो मेरे भाई.....
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
होली
होली
Madhu Shah
आपकी वजह से किसी को दर्द ना हो
आपकी वजह से किसी को दर्द ना हो
Aarti sirsat
जरूरी है
जरूरी है
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
जो समय सम्मुख हमारे आज है।
जो समय सम्मुख हमारे आज है।
surenderpal vaidya
इंसान दुनिया जमाने से भले झूठ कहे
इंसान दुनिया जमाने से भले झूठ कहे
ruby kumari
मैं  ज़्यादा  बोलती  हूँ  तुम भड़क जाते हो !
मैं ज़्यादा बोलती हूँ तुम भड़क जाते हो !
Neelofar Khan
*खुशी लेकर चली आए, सभी के द्वार दीवाली (हिंदी गजल)*
*खुशी लेकर चली आए, सभी के द्वार दीवाली (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
सभी धर्म महान
सभी धर्म महान
RAKESH RAKESH
मैं घमंडी नहीं हूँ ना कभी घमंड किया हमने
मैं घमंडी नहीं हूँ ना कभी घमंड किया हमने
Dr. Man Mohan Krishna
दोहा पंचक. . . नैन
दोहा पंचक. . . नैन
sushil sarna
गौरी सुत नंदन
गौरी सुत नंदन
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
"स्मार्ट विलेज"
Dr. Kishan tandon kranti
देश के वासी हैं
देश के वासी हैं
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
23/08.छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
23/08.छत्तीसगढ़ी पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
मेरे अंशुल तुझ बिन.....
मेरे अंशुल तुझ बिन.....
Santosh Soni
मुझे लगता था —
मुझे लगता था —
SURYA PRAKASH SHARMA
वक्त सबको पहचानने की काबिलियत देता है,
वक्त सबको पहचानने की काबिलियत देता है,
Jogendar singh
आस नहीं मिलने की फिर भी,............ ।
आस नहीं मिलने की फिर भी,............ ।
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
परछाई
परछाई
Dr Parveen Thakur
ख़ुद पे गुजरी तो मेरे नसीहतगार,
ख़ुद पे गुजरी तो मेरे नसीहतगार,
ओसमणी साहू 'ओश'
टेढ़े-मेढ़े दांत वालीं
टेढ़े-मेढ़े दांत वालीं
The_dk_poetry
नव वर्ष मंगलमय हो
नव वर्ष मंगलमय हो
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
..
..
*प्रणय प्रभात*
रात भर नींद की तलब न रही हम दोनों को,
रात भर नींद की तलब न रही हम दोनों को,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
"The Dance of Joy"
Manisha Manjari
घनाक्षरी गीत...
घनाक्षरी गीत...
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...