Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 May 2023 · 1 min read

*बहुत ज्यादा न सुख की चाह, हे भगवन मुझे देना 【मुक्तक 】*

बहुत ज्यादा न सुख की चाह, हे भगवन मुझे देना 【मुक्तक 】
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
बहुत ज्यादा न सुख की चाह, हे भगवन मुझे देना
सरल-सच्ची हो सीधी राह, हे भगवन मुझे देना
नहीं पाथेय-पथ अनुचित, न निधियों की जरूरत है
मिले मन शांत वह उत्साह, हे भगवन मुझे देना
—————————————————
रचयिता :रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा,, रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

1 Like · 606 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
गुलाल का रंग, गुब्बारों की मार,
गुलाल का रंग, गुब्बारों की मार,
Ranjeet kumar patre
वीरवर (कारगिल विजय उत्सव पर)
वीरवर (कारगिल विजय उत्सव पर)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
दीया इल्म का कोई भी तूफा बुझा नहीं सकता।
दीया इल्म का कोई भी तूफा बुझा नहीं सकता।
Phool gufran
कभी आ
कभी आ
हिमांशु Kulshrestha
पल- पल बदले जिंदगी,
पल- पल बदले जिंदगी,
sushil sarna
जब तुम मिलीं - एक दोस्त से सालों बाद मुलाकात होने पर ।
जब तुम मिलीं - एक दोस्त से सालों बाद मुलाकात होने पर ।
Dhriti Mishra
"सियासत का सेंसेक्स"
*प्रणय प्रभात*
!! सुविचार !!
!! सुविचार !!
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
देर आए दुरुस्त आए...
देर आए दुरुस्त आए...
Harminder Kaur
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
2695.*पूर्णिका*
2695.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
पैर धरा पर हो, मगर नजर आसमां पर भी रखना।
पैर धरा पर हो, मगर नजर आसमां पर भी रखना।
Seema gupta,Alwar
हार को तिरस्कार ना करें
हार को तिरस्कार ना करें
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मैं ढूंढता हूं रातो - दिन कोई बशर मिले।
मैं ढूंढता हूं रातो - दिन कोई बशर मिले।
सत्य कुमार प्रेमी
क्या खोया क्या पाया
क्या खोया क्या पाया
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
"डीजे"
Dr. Kishan tandon kranti
खुद की तलाश में।
खुद की तलाश में।
Taj Mohammad
संवेदनाओं का भव्य संसार
संवेदनाओं का भव्य संसार
Ritu Asooja
ऑंसू छुपा के पर्स में, भरती हैं पत्नियॉं
ऑंसू छुपा के पर्स में, भरती हैं पत्नियॉं
Ravi Prakash
सच्चाई ~
सच्चाई ~
दिनेश एल० "जैहिंद"
सिर्फ विकट परिस्थितियों का सामना
सिर्फ विकट परिस्थितियों का सामना
Anil Mishra Prahari
रचो महोत्सव
रचो महोत्सव
लक्ष्मी सिंह
हुनरमंद लोग तिरस्कृत क्यों
हुनरमंद लोग तिरस्कृत क्यों
Mahender Singh
जंग के भरे मैदानों में शमशीर बदलती देखी हैं
जंग के भरे मैदानों में शमशीर बदलती देखी हैं
Ajad Mandori
इंसानियत के लिए
इंसानियत के लिए
Dr. Rajeev Jain
पनघट
पनघट
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
ग्वालियर, ग्वालियर, तू कला का शहर,तेरी भव्यता का कोई सानी नह
ग्वालियर, ग्वालियर, तू कला का शहर,तेरी भव्यता का कोई सानी नह
पूर्वार्थ
गीत मौसम का
गीत मौसम का
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
पाती कोई जब लिखता है।
पाती कोई जब लिखता है।
डॉक्टर रागिनी
यूँ भी होता है,अगर दिल में ख़लिश आ जाए,,
यूँ भी होता है,अगर दिल में ख़लिश आ जाए,,
Shweta Soni
Loading...