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18 Feb 2017 · 1 min read

बस यूं ही कह दिया

कष्ट की इक रात को काटने में
न जाने कितना समय गुजर गया
सुख की हर रात को कभी मुझे
गिनती करने की जरूरत ही नहीं पड़ी

तन को धोता है तून प्राणी
मल मल के रोजाना
काश अपने मन को भी
ऐसे ही धोता रहेगा…

तो तेरा जीवन सफल हो जाएगा…

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

Language: Hindi
Tag: कविता
145 Views

Books from गायक और लेखक अजीत कुमार तलवार

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