Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Jan 2017 · 1 min read

बसंत

बसंत खड़ा द्वार

पल्लवित कुसुम,हरित कोमल पत्र सम्भार
दिग सुशोभित,हर्षित-गर्वित धरा रूप अपार
शीतलता ग्रसित,रंजीत रक्ताभ अधर- कपार
स्वेत वैरागी परिधेय मुक्त आया रंगीन वाहर
सुगंध पुष्प-पल्लव नवांकुरोन्मुख बसंत द्वार
विविधता में प्रकृति स्वीकृत प्रदत्त ऋतु शृंगार
धरित्री तरुणी सम बलखाती चतुर्दिक नीहार
आगत फाल्गुन,विरही प्रिया व्याकुलता धार
लाक्षणिक उमंग उल्लाष उन्मुख रंजीत संसार
प्रस्फुटीत मन में नव किरण बसंत खड़ा द्वार

सजन

(श्री जनमेजय त्रिवेदी जी के “बसंत गीत” से प्रभावित)

Language: Hindi
623 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जुबां बोल भी नहीं पाती है।
जुबां बोल भी नहीं पाती है।
नेताम आर सी
💐Prodigy Love-8💐
💐Prodigy Love-8💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
सिपाहियों के दस्ता कर रहें गस्त हैं,
सिपाहियों के दस्ता कर रहें गस्त हैं,
Satish Srijan
व्यक्ति की सबसे बड़ी भक्ति और शक्ति यही होनी चाहिए कि वह खुद
व्यक्ति की सबसे बड़ी भक्ति और शक्ति यही होनी चाहिए कि वह खुद
Rj Anand Prajapati
आँखे मूंदकर
आँखे मूंदकर
'अशांत' शेखर
Ghughat maryada hai, majburi nahi.
Ghughat maryada hai, majburi nahi.
Sakshi Tripathi
वक्त के इस भवंडर में
वक्त के इस भवंडर में
Harminder Kaur
वक्त कितना भी बुरा हो,
वक्त कितना भी बुरा हो,
Dr. Man Mohan Krishna
काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं
काल चक्र कैसा आया यह, लोग दिखावा करते हैं
पूर्वार्थ
अपनत्वपूर्ण नोक-झोंक और अकड़ भरी बदतमीज़ी में ज़मीन-आसमान का फ़र
अपनत्वपूर्ण नोक-झोंक और अकड़ भरी बदतमीज़ी में ज़मीन-आसमान का फ़र
*Author प्रणय प्रभात*
भाव - श्रृँखला
भाव - श्रृँखला
Shyam Sundar Subramanian
बैठे-बैठे यूहीं ख्याल आ गया,
बैठे-बैठे यूहीं ख्याल आ गया,
Sonam Pundir
दे ऐसी स्वर हमें मैया
दे ऐसी स्वर हमें मैया
Basant Bhagawan Roy
దేవత స్వరూపం గో మాత
దేవత స్వరూపం గో మాత
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
आपके द्वारा हुई पिछली गलतियों को वर्तमान में ना दोहराना ही,
आपके द्वारा हुई पिछली गलतियों को वर्तमान में ना दोहराना ही,
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
चाय का निमंत्रण
चाय का निमंत्रण
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
"मैं एक कलमकार हूँ"
Dr. Kishan tandon kranti
अन्नदाता किसान
अन्नदाता किसान
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
तुम्हारे बिन कहां मुझको कभी अब चैन आएगा।
तुम्हारे बिन कहां मुझको कभी अब चैन आएगा।
सत्य कुमार प्रेमी
चले न कोई साथ जब,
चले न कोई साथ जब,
sushil sarna
*रखो सम्मोहक बोली 【कुंडलिया】*
*रखो सम्मोहक बोली 【कुंडलिया】*
Ravi Prakash
*** आप भी मुस्कुराइए ***
*** आप भी मुस्कुराइए ***
Chunnu Lal Gupta
2717.*पूर्णिका*
2717.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सिलसिला रात का
सिलसिला रात का
Surinder blackpen
बुला लो
बुला लो
Dr.Pratibha Prakash
पूर्ण विराग
पूर्ण विराग
लक्ष्मी सिंह
* मणिपुर की जो घटना सामने एक विचित्र घटना उसके बारे में किसी
* मणिपुर की जो घटना सामने एक विचित्र घटना उसके बारे में किसी
Vicky Purohit
सरस्वती वंदना-3
सरस्वती वंदना-3
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
★गैर★
★गैर★
★ IPS KAMAL THAKUR ★
Where is love?
Where is love?
Otteri Selvakumar
Loading...