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7 Sep 2016 · 1 min read

बरसे बरसे बरखा बरसे

बरसे बरसे बरखा बरसे,
पिया मिलन को जिया तरसे,

घनघोर बदरिया छायी रे,
जले बदन बरखा के जल से,

पुरज़ोर बिजुरिया भी है चमके,
सावन संग मेरे नैना भी बरसें,

कहीं कोई कोयलिया कु कु कूके,
चिढ़ होवे मुझे बहती सर्द हवा से,

छोड़ “मनी” सेवाई तू आजा रे,
संग तेरे झूमने को है मन तरसे,
तू आजा रे….

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