Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Nov 11, 2016 · 1 min read

बनावट

बनावट की है दुनिया,यहां बस तमाशा कीजिए
अच्छे इंसा नही तो क्या, अदाकारी अच्छी कीजिए

लगाकर सजीला मुखौटा,बदरंग चेहरा छुपा लीजिए
सच से नही सरोकार,जितना जी चाहे झूठ बोल लीजिए

उजला हुआ मन तो लानते मिलेगीं
मन काला रखकर पुरस्कार पा लीजिए

प्रेम ,ममता ,मित्रता अनमोल है मगर
अपने स्वार्थ की खातिर इनको छोड दीजिए

रिश्तो की है परवाह ,उनका मान भी बहुत है
पर अपने सुखो की खातिर दूजो को दुख दीजिए

कह रही है प्रीति हकीकत ये जहां की
जो यकीं न आये तो खुद जांच लीजिए

354 Views
You may also like:
मिट्टी की कीमत
निकेश कुमार ठाकुर
आदमी कितना नादान है
Ram Krishan Rastogi
आंसूओं की नमी
Dr fauzia Naseem shad
पितृ स्तुति
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
माँ की याद
Meenakshi Nagar
सुन्दर घर
Buddha Prakash
मैं कुछ कहना चाहता हूं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
"अष्टांग योग"
पंकज कुमार कर्ण
मत रो ऐ दिल
Anamika Singh
जिन्दगी का जमूरा
Anamika Singh
इस दर्द को यदि भूला दिया, तो शब्द कहाँ से...
Manisha Manjari
✍️महानता✍️
'अशांत' शेखर
पिता
Manisha Manjari
'फूल और व्यक्ति'
Vishnu Prasad 'panchotiya'
कभी ज़मीन कभी आसमान.....
अश्क चिरैयाकोटी
इस तरह
Dr fauzia Naseem shad
हम तुमसे जब मिल नहीं पाते
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
सिद्धार्थ से वह 'बुद्ध' बने...
Buddha Prakash
दूल्हे अब बिकते हैं (एक व्यंग्य)
Ram Krishan Rastogi
आस
लक्ष्मी सिंह
✍️सच बता कर तो देखो ✍️
Vaishnavi Gupta
बेचारी ये जनता
शेख़ जाफ़र खान
आज नहीं तो कल होगा / (समकालीन गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
पितु संग बचपन
मनोज कर्ण
बंदर भैया
Buddha Prakash
संघर्ष
Arjun Chauhan
रूखा रे ! यह झाड़ / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
बेजुबां जीव
साहित्य लेखन- एहसास और जज़्बात
विन मानवीय मूल्यों के जीवन का क्या अर्थ है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
यादें वो बचपन के
Khushboo Khatoon
Loading...