Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Dec 2023 · 1 min read

बचा ले मुझे🙏🙏

बचा ले मुझे🙏🙏
लाल बचा लो इसे जरा
धरा धरती चीख रही
लाल बचा लो मुझे जरा
जगह पड़ी कूड़ा कर्कट

देख प्राण वायु रो रहा
अणु परमाणु के कण
लघु से विस्तृत हो रहा
नभ छिद्रित ब्लैकहोल से

घातक किरणें विविध विषाणु
कोरोना कोहराम मचा रहा
नव वेरियेंट ओमीक्रोम जेऐन1
त्राहिमाम तांडव दिखा रहा

रत्नागिरी कोप तरंगित हो
प्रकृति प्रकोप दिख रहा
लाल बचा लो इसे जरा
बेचैन हवा निर्वाक हो
जन मानस चेता रहा

पवन का दम घूंट रहा
रोग विषाणु बढ रहा
प्राणी दम तोड़ रहा
आ लाल मुझे बचा ले आज
टी . पी. तरुण

105 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
View all
You may also like:
हर एक मंजिल का अपना कहर निकला
हर एक मंजिल का अपना कहर निकला
कवि दीपक बवेजा
बन गए हम तुम्हारी याद में, कबीर सिंह
बन गए हम तुम्हारी याद में, कबीर सिंह
The_dk_poetry
हो....ली
हो....ली
Preeti Sharma Aseem
2) “काग़ज़ की कश्ती”
2) “काग़ज़ की कश्ती”
Sapna Arora
3456🌷 *पूर्णिका* 🌷
3456🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
मतदान
मतदान
साहिल
हश्र का वह मंज़र
हश्र का वह मंज़र
Shekhar Chandra Mitra
मुफ़लिसों को मुस्कुराने दीजिए।
मुफ़लिसों को मुस्कुराने दीजिए।
सत्य कुमार प्रेमी
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
सच
सच
Sanjay ' शून्य'
कभी नहीं है हारा मन (गीतिका)
कभी नहीं है हारा मन (गीतिका)
surenderpal vaidya
लिखा नहीं था नसीब में, अपना मिलन
लिखा नहीं था नसीब में, अपना मिलन
gurudeenverma198
यूं ना कर बर्बाद पानी को
यूं ना कर बर्बाद पानी को
Ranjeet kumar patre
बहुत अंदर तक जला देती हैं वो शिकायतें,
बहुत अंदर तक जला देती हैं वो शिकायतें,
शेखर सिंह
हवलदार का करिया रंग (हास्य कविता)
हवलदार का करिया रंग (हास्य कविता)
गुमनाम 'बाबा'
जीवन आसान नहीं है...
जीवन आसान नहीं है...
Ashish Morya
मन में सदैव अपने
मन में सदैव अपने
Dr fauzia Naseem shad
वारिस हुई
वारिस हुई
Dinesh Kumar Gangwar
बगैर पैमाने के
बगैर पैमाने के
Satish Srijan
I know that you are tired of being in this phase of life.I k
I know that you are tired of being in this phase of life.I k
पूर्वार्थ
अलबेला अब्र
अलबेला अब्र
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
पापा जी
पापा जी
नाथ सोनांचली
■ आंसू माने भेदिया।
■ आंसू माने भेदिया।
*Author प्रणय प्रभात*
पिता (मर्मस्पर्शी कविता)
पिता (मर्मस्पर्शी कविता)
Dr. Kishan Karigar
"नायक"
Dr. Kishan tandon kranti
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
पर्वत को आसमान छूने के लिए
पर्वत को आसमान छूने के लिए
उमेश बैरवा
सुबह भी तुम, शाम भी तुम
सुबह भी तुम, शाम भी तुम
Writer_ermkumar
नदिया के पार (सिनेमा) / MUSAFIR BAITHA
नदिया के पार (सिनेमा) / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
तुमसे मिलना इतना खुशनुमा सा था
तुमसे मिलना इतना खुशनुमा सा था
Kumar lalit
Loading...