Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Feb 2024 · 1 min read

बचपन का प्यार

💞बचपन का प्यार💞
याद आता है अब वो बचपन का जमाना
वो बचपन का प्यारवो वखुशियों का खज़ाना

हर कोई होता था हमारी नादानियों का दीवाना
ना होती रोने की वजह ना हंसने का बहाना
मंद मंद मुस्कान लिए सदा माँ को सताना
कभी रूठना तो कभी मनाना
याद आता हैं अब वो बचपन का जमाना
कहाँ चला गया आज……
वो बचपन का प्यार वो बचपन का ज़माना
एक साथ मिलकर शाम को खेलना
व़ सबका हँसना हँसाना,
बहुत याद आता है वो बचपन वो बचपन का प्यार
वो बचपन का ज़माना
जब न थी फेसबुक न मोबाइल और टेबलेट का ज़माना,
कितना अच्छा था वो बचपन ,वो प्यार वो यारों का ज़माना,
जब से आ गए फेसबुक, मोबाइल और टेबलेट खो लिया इन्होंने आजकल बच्चों का बचपन सुहाना,
आजकल तो बच्चों की खुशी का बस यही है खज़ाना,
आजकल के बच्चों का हर खेल से जीवन है अंज़ाना
बस मोबाइल ही है आजकल इनके बचपन का प्यार और खुशियों का ठिकाना,
हमें तो आज भी याद आता है अपना बीता हुआ बचपन,
वो खेल ,वो मस्ती वो बचपन सुहाना,
अब तो रह गई स्बस यादें पुरानी, बीत गया वो वक्त सुहाना,
यारों संग मिलकर वो हमारा शरारतें करना ,लोगों को सताना,
फिर लोगों का पापा को शिकायत लगाना और मम्मी का हमें बचाना,
आज बस यही है ख्वाहिश……
मिल जाए फिर से बचपन को जीने का बहाना,
काश …….कोई लौटा दे हमारा वो बचपन ,बचपन का प्यार,
वो खुशियों का खज़ाना।

138 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
तुम न जाने कितने सवाल करते हो।
तुम न जाने कितने सवाल करते हो।
Swami Ganganiya
काश वो होते मेरे अंगना में
काश वो होते मेरे अंगना में
मनमोहन लाल गुप्ता 'अंजुम'
इश्क का तोता
इश्क का तोता
Neelam Sharma
राज़ की बात
राज़ की बात
Shaily
जिंदगी
जिंदगी
Madhavi Srivastava
जीवन की रंगत: सुख और दुख का संगम
जीवन की रंगत: सुख और दुख का संगम
पूर्वार्थ
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
ये आँखे हट नही रही तेरे दीदार से, पता नही
ये आँखे हट नही रही तेरे दीदार से, पता नही
Tarun Garg
पौधे मांगे थे गुलों के
पौधे मांगे थे गुलों के
Umender kumar
तुझे याद करता हूँ क्या तुम भी मुझे याद करती हो
तुझे याद करता हूँ क्या तुम भी मुझे याद करती हो
Rituraj shivem verma
क्यूँ भागती हैं औरतें
क्यूँ भागती हैं औरतें
Pratibha Pandey
■ मिली-जुली ग़ज़ल
■ मिली-जुली ग़ज़ल
*प्रणय प्रभात*
* मिट जाएंगे फासले *
* मिट जाएंगे फासले *
surenderpal vaidya
ग़ज़ल _ धड़कन में बसे रहते ।
ग़ज़ल _ धड़कन में बसे रहते ।
Neelofar Khan
आज के लिए जिऊँ लक्ष्य ये नहीं मेरा।
आज के लिए जिऊँ लक्ष्य ये नहीं मेरा।
संतोष बरमैया जय
बेवजह कभी कुछ  नहीं होता,
बेवजह कभी कुछ नहीं होता,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
*बारिश आई (बाल कविता)*
*बारिश आई (बाल कविता)*
Ravi Prakash
3273.*पूर्णिका*
3273.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मुरली कि धुन
मुरली कि धुन
Anil chobisa
नज़रें बयां करती हैं, लेकिन इज़हार नहीं करतीं,
नज़रें बयां करती हैं, लेकिन इज़हार नहीं करतीं,
Keshav kishor Kumar
आज एक अरसे बाद मेने किया हौसला है,
आज एक अरसे बाद मेने किया हौसला है,
Raazzz Kumar (Reyansh)
यादों के तराने
यादों के तराने
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
ना मसले अदा के होते हैं
ना मसले अदा के होते हैं
Phool gufran
फितरत अमिट जन एक गहना
फितरत अमिट जन एक गहना
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
चाहत
चाहत
Sûrëkhâ
दोहा मुक्तक
दोहा मुक्तक
sushil sarna
सोने के भाव बिके बैंगन
सोने के भाव बिके बैंगन
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Love ❤
Love ❤
HEBA
फ़ासले जब भी
फ़ासले जब भी
Dr fauzia Naseem shad
फैसला
फैसला
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...