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21 Jun 2016 · 1 min read

प्रेम

दो मुक्तक

खट्टा-मीठा कड़वा सब भूलते गए
प्रेम में भगवान के जब डूबते गए
सार सारा ज़िन्दगी का आ गया समझ
और बंधन मोह के भी टूटते गए

रहे दिल में ये अभिलाषा
कि सीखें प्रेम की भाषा
निभाना है इसे मुश्किल
कठिन है इसकी परिभाषा

डॉ अर्चना गुप्ता

Language: Hindi
379 Views
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