Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Dec 2023 · 1 min read

प्रेम मे डुबी दो रुहएं

प्रेम मे डुबी दो रुहएं
अबोध शिशु के समान होती है,,
पहचानती है
बस स्नेह की भाषा,,,
पलटती है
केवल लाड़ की लिपि पर,,,
सूंघ लेती है
गंध पवित्र भावनाओं की,,,,
मचलती है सुन कर
प्रेमी की आवाज,,,
ईश्वर स्वयं बचाते हैं
प्रतिपल नासमझो को
प्रेम मे डूबी दो रुहएं
ईश्वर की गोद मे खेलती है.

2 Likes · 129 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
खुश है हम आज क्यों
खुश है हम आज क्यों
gurudeenverma198
कुछ तो अच्छा छोड़ कर जाओ आप
कुछ तो अच्छा छोड़ कर जाओ आप
Shyam Pandey
दिलबर दिलबर
दिलबर दिलबर
DR ARUN KUMAR SHASTRI
"गौरतलब"
Dr. Kishan tandon kranti
आदिशक्ति वन्दन
आदिशक्ति वन्दन
Mohan Pandey
" महखना "
Pushpraj Anant
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
"बचपन"
Tanveer Chouhan
इतने दिनों बाद आज मुलाकात हुईं,
इतने दिनों बाद आज मुलाकात हुईं,
Stuti tiwari
तेरे गम का सफर
तेरे गम का सफर
Rajeev Dutta
बोलो_क्या_तुम_बोल_रहे_हो?
बोलो_क्या_तुम_बोल_रहे_हो?
संजीव शुक्ल 'सचिन'
विज्ञान का चमत्कार देखो,विज्ञान का चमत्कार देखो,
विज्ञान का चमत्कार देखो,विज्ञान का चमत्कार देखो,
पूर्वार्थ
Desires are not made to be forgotten,
Desires are not made to be forgotten,
Sakshi Tripathi
💐प्रेम कौतुक-528💐
💐प्रेम कौतुक-528💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
अब तो आ जाओ कान्हा
अब तो आ जाओ कान्हा
Paras Nath Jha
एक सच और सोच
एक सच और सोच
Neeraj Agarwal
कुछ तो बाकी है !
कुछ तो बाकी है !
Akash Yadav
जो लोग अपनी जिंदगी से संतुष्ट होते हैं वे सुकून भरी जिंदगी ज
जो लोग अपनी जिंदगी से संतुष्ट होते हैं वे सुकून भरी जिंदगी ज
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
भीड़ ने भीड़ से पूछा कि यह भीड़ क्यों लगी है? तो भीड़ ने भीड
भीड़ ने भीड़ से पूछा कि यह भीड़ क्यों लगी है? तो भीड़ ने भीड
जय लगन कुमार हैप्पी
सहज है क्या _
सहज है क्या _
Aradhya Raj
दर्शक की दृष्टि जिस पर गड़ जाती है या हम यूं कहे कि भारी ताद
दर्शक की दृष्टि जिस पर गड़ जाती है या हम यूं कहे कि भारी ताद
Rj Anand Prajapati
ज़माना साथ था कल तक तो लगता था अधूरा हूँ।
ज़माना साथ था कल तक तो लगता था अधूरा हूँ।
*Author प्रणय प्रभात*
बातें
बातें
Sanjay ' शून्य'
सहारे
सहारे
Kanchan Khanna
कोई उम्मीद
कोई उम्मीद
Dr fauzia Naseem shad
*बदकिस्मत थे, जेल हो गई 【हिंदी गजल/गीतिका】*
*बदकिस्मत थे, जेल हो गई 【हिंदी गजल/गीतिका】*
Ravi Prakash
गलतियाँ हो गयीं होंगी
गलतियाँ हो गयीं होंगी
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
किसी से दोस्ती ठोक–बजा कर किया करो, नहीं तो, यह बालू की भीत साबित
किसी से दोस्ती ठोक–बजा कर किया करो, नहीं तो, यह बालू की भीत साबित
Dr MusafiR BaithA
Emerging Water Scarcity Problem in Urban Areas
Emerging Water Scarcity Problem in Urban Areas
Shyam Sundar Subramanian
चुन लेना राह से काँटे
चुन लेना राह से काँटे
Kavita Chouhan
Loading...