Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 May 2018 · 1 min read

प्रवाहमान ज़िंदगी

प्रवाहमान है समय
प्रवाहमान ज़िंदगी
बहे नदी, तिरे घटा
बदल बदल रहे छटा
है एक गान ज़िंदगी
प्रवाहमान ज़िंदगी।

रंग हैं बदल रहे
रूप भी बदल रहे
बदल रहा है काल भी
दिवा निशी बदल रहे
बदल रहे ऋतु वलय
ग्रीष्म शीत चल रहे
बदल रहे लता कुसुम
बदल रही है वल्लरी
प्रवाहमान ज़िंदगी।

जो आज है
वह कल न था
जो कल रहे
न आज है
लहर लहर बदल रही
अनन्त सा निनाद है
गगन वही धरा वही
अणु अणु बदल रही
प्रवाहमान ज़िंदगी।

प्रवाहमान सूर्य है
प्रवाहमान तारा गण
प्रवाहमान नियम हैं
प्रवाहमान सन्तुलन
प्रवाहमान पथिक जन
प्रवाहमान है गली।
प्रवाहमान है समय
प्रवाहमान ज़िंदगी।

विपिन

Language: Hindi
399 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
चंचल मन
चंचल मन
Dinesh Kumar Gangwar
पर्यावरण प्रतिभाग
पर्यावरण प्रतिभाग
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
लहजा
लहजा
Naushaba Suriya
* मिट जाएंगे फासले *
* मिट जाएंगे फासले *
surenderpal vaidya
सदा दूर रहो गम की परछाइयों से,
सदा दूर रहो गम की परछाइयों से,
Ranjeet kumar patre
जो बातें अनुकूल नहीं थीं
जो बातें अनुकूल नहीं थीं
Suryakant Dwivedi
तेवरी आन्दोलन की साहित्यिक यात्रा *अनिल अनल
तेवरी आन्दोलन की साहित्यिक यात्रा *अनिल अनल
कवि रमेशराज
Don't break a bird's wings and then tell it to fly.
Don't break a bird's wings and then tell it to fly.
पूर्वार्थ
"अगर"
Dr. Kishan tandon kranti
हिसाब हुआ जब संपत्ति का मैंने अपने हिस्से में किताबें मांग ल
हिसाब हुआ जब संपत्ति का मैंने अपने हिस्से में किताबें मांग ल
Lokesh Sharma
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
ये ढलती शाम है जो, रुमानी और होगी।
ये ढलती शाम है जो, रुमानी और होगी।
सत्य कुमार प्रेमी
अहोभाग्य
अहोभाग्य
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जिस देश में लोग संत बनकर बलात्कार कर सकते है
जिस देश में लोग संत बनकर बलात्कार कर सकते है
शेखर सिंह
दो शे'र ( चाँद )
दो शे'र ( चाँद )
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
*माँ जगत जननी*
*माँ जगत जननी*
Vedkanti bhaskar
हालात ए शोख निगाहों से जब बदलती है ।
हालात ए शोख निगाहों से जब बदलती है ।
Phool gufran
*केवल जाति-एकता की, चौतरफा जय-जयकार है 【मुक्तक】*
*केवल जाति-एकता की, चौतरफा जय-जयकार है 【मुक्तक】*
Ravi Prakash
धन की खातिर तन बिका, साथ बिका ईमान ।
धन की खातिर तन बिका, साथ बिका ईमान ।
sushil sarna
ना वह हवा ना पानी है अब
ना वह हवा ना पानी है अब
VINOD CHAUHAN
सच तो लकड़ी का महत्व होता हैं।
सच तो लकड़ी का महत्व होता हैं।
Neeraj Agarwal
हिरख दी तंदे नें में कदे बनेआ गें नेई तुगी
हिरख दी तंदे नें में कदे बनेआ गें नेई तुगी
Neelam Kumari
#ग़ज़ल
#ग़ज़ल
*प्रणय प्रभात*
3433⚘ *पूर्णिका* ⚘
3433⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
शीतलहर
शीतलहर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
"मैं सब कुछ सुनकर मैं चुपचाप लौट आता हूँ
गुमनाम 'बाबा'
यादों की याद रखना
यादों की याद रखना
Dr. Rajeev Jain
जीवन में प्यास की
जीवन में प्यास की
Dr fauzia Naseem shad
क्या यह महज संयोग था या कुछ और.... (1)
क्या यह महज संयोग था या कुछ और.... (1)
Dr. Pradeep Kumar Sharma
तबीयत मचल गई
तबीयत मचल गई
Surinder blackpen
Loading...