Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Mar 2019 · 1 min read

प्रण

प्रण
रग रग में विष भरा दुराव
पग पग पे छलना स्वभाव
विश्वास छलभरी बातों का
अहसास हमें उन घातों का
खण्डित सदा संकल्प तेरे
बचे पास कौन विकल्प मेरे
समय रहते जो तुम चेत जाते
आतंक का यूँ न खेत लहराते
मन में ठान लिया जो अब प्रण
कुचलेंगे सकल दुष्ट अहिफण
यह तो महज एक प्रतिकार है
हुआ कहाँ अभी असल वार है
-©नवल किशोर सिंह

Language: Hindi
347 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from नवल किशोर सिंह
View all
You may also like:
सुरसरि-सा निर्मल बहे, कर ले मन में गेह।
सुरसरि-सा निर्मल बहे, कर ले मन में गेह।
डॉ.सीमा अग्रवाल
आज यूँ ही कुछ सादगी लिख रही हूँ,
आज यूँ ही कुछ सादगी लिख रही हूँ,
Swara Kumari arya
होली -रमजान ,दीवाली
होली -रमजान ,दीवाली
DrLakshman Jha Parimal
तेरे जाने के बाद ....
तेरे जाने के बाद ....
ओनिका सेतिया 'अनु '
सरकारी नौकरी लगने की चाहत ने हमे ऐसा घेरा है
सरकारी नौकरी लगने की चाहत ने हमे ऐसा घेरा है
पूर्वार्थ
खेल खेल में छूट न जाए जीवन की ये रेल।
खेल खेल में छूट न जाए जीवन की ये रेल।
सत्य कुमार प्रेमी
मृत्यु भय
मृत्यु भय
DR ARUN KUMAR SHASTRI
#दोहा
#दोहा
*Author प्रणय प्रभात*
तुम अभी आना नहीं।
तुम अभी आना नहीं।
Taj Mohammad
सियासत
सियासत
Anoop Kumar Mayank
चंदा की डोली उठी
चंदा की डोली उठी
Shekhar Chandra Mitra
स्मृति : पंडित प्रकाश चंद्र जी
स्मृति : पंडित प्रकाश चंद्र जी
Ravi Prakash
‘‘शिक्षा में क्रान्ति’’
‘‘शिक्षा में क्रान्ति’’
Mr. Rajesh Lathwal Chirana
मेरी शक्ति
मेरी शक्ति
Dr.Priya Soni Khare
योग
योग
लक्ष्मी सिंह
चौकड़िया छंद / ईसुरी छंद , विधान उदाहरण सहित , व छंद से सृजित विधाएं
चौकड़िया छंद / ईसुरी छंद , विधान उदाहरण सहित , व छंद से सृजित विधाएं
Subhash Singhai
इश्क़ ❤️
इश्क़ ❤️
Skanda Joshi
उम्र के हर एक पड़ाव की तस्वीर क़ैद कर लेना
उम्र के हर एक पड़ाव की तस्वीर क़ैद कर लेना
'अशांत' शेखर
आज की सौगात जो बख्शी प्रभु ने है तुझे
आज की सौगात जो बख्शी प्रभु ने है तुझे
Saraswati Bajpai
"निरक्षर-भारती"
Prabhudayal Raniwal
बुद्ध की राह में चलने लगे ।
बुद्ध की राह में चलने लगे ।
Buddha Prakash
"बलवान"
Dr. Kishan tandon kranti
वक्त
वक्त
Namrata Sona
दिल का तुमको
दिल का तुमको
Dr fauzia Naseem shad
मौसम
मौसम
Monika Verma
नारी हूँ मैं
नारी हूँ मैं
Kavi praveen charan
समय और मौसम सदा ही बदलते रहते हैं।इसलिए स्वयं को भी बदलने की
समय और मौसम सदा ही बदलते रहते हैं।इसलिए स्वयं को भी बदलने की
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता क्यों कहा..?
महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता क्यों कहा..?
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
कुछ देर तुम ऐसे ही रहो
कुछ देर तुम ऐसे ही रहो
gurudeenverma198
मेरा नाम
मेरा नाम
Yash mehra
Loading...