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9 Jun 2022 · 1 min read

🚩पिता

🧿
पितु,पोषक सद्ज्ञान 1️⃣ठाँव है।
नवजीवन-उत्थान 2️⃣पाँव है।
जगत्-सिंधु के पास आप,तब।
बोध-सूर्य की धूपछाँव है।

🧿
पितु दुलार है,सफल प्यार है।
खुशियों की पोषक बयार है।
संस्कारों की दिव्य रोशनी,
औ शुभ संस्कृति बेशुमार है।

🧿
पिता खेल है और मेल है।
लाए खिलौनामयी रेल है।
जीवन के उत्थान-पतन में,
साथ खड़ा, तू कहाँ फेल है?
——————————

🦜शब्दार्थ

1️⃣ ठाँव=ठिकाना
2️⃣पाँव=आधार
——————————
पं बृजेश कुमार नायक
9956928367

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
9 Likes · 9 Comments · 608 Views
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