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24 Jul 2019 · 1 min read

पावनता

पावनता

नहर का नीला पानी
लगा मुझे चिरयात्री
आया पहाड़ों से
चलता रहा है निर्बाध
थकान भी नहीं है
ऊबा भी नहीं सफर से
जाना भी है बहुत दूर
चला जा रहा है चुपचाप
गतिशीलता ने
रखी है महफूज
इसकी पावनता
अगर ये
कहीं ठहर जाता
किसी तालाब में
तो खो देता
अपनी पावनता

-विनोद सिल्ला©

Language: Hindi
Tag: कविता
268 Views
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