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1 Aug 2023 · 1 min read

*परिस्थिति चाहे जैसी हो, उन्हें स्वीकार होती है (मुक्तक)*

परिस्थिति चाहे जैसी हो, उन्हें स्वीकार होती है (मुक्तक)
————————————-
कभी आभार की-आलोचना की धार होती है
कभी जय की-पराजय की, कभी बौछार होती है
जिन्हें मालूम खुश रहने की, जीवन में कला अद्‌भुत
परिस्थिति चाहे जैसी हो, उन्हें स्वीकार होती है
—————————————-
रचयिता :रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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