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29 Oct 2023 · 1 min read

नजर लगी हा चाँद को, फीकी पड़ी उजास।

नजर लगी हा चाँद को, फीकी पड़ी उजास।
नेह धरा का भूलकर, बना राहु का ग्रास।।

© सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद

Language: Hindi
2 Likes · 77 Views
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