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4 Mar 2023 · 1 min read

दोहा

दोहा
माना हैं सच के लिए,हम थोड़े बदनाम।
भरी दोपहर को कहो,कैसे कह दें शाम।।
डाॅ.बिपिन पाण्डेय

1 Like · 146 Views
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