Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Feb 2017 · 1 min read

देर आये,दुरुस्त आये

देर आये,दुरुस्त आये
हर्फ़ों का बाज़ार साथ लाये।
हर एक पहलू को समझ कर आये
पन्नो में सजाते जाए,ये हर्फ़ ही सबको दर्द समझाये।
विकास का मुद्दा नझर ना आये
नेताओं की जबान फिसलती जाए।
ग़रीबी ने पैर फैलाए
आरोप में आरोप लगाए
भ्र्ष्टाचार बढाते जाये
बेरोज़गारी बढाते जाये।
दंगे सुलगते जाए
धर्मो की आड़ में,इंसानियत का लहू बहाए।
हैवानियत भी बढ़ती जाये
इंसा भी जब शैतान बन जाये
स्त्रियों का चिरहरण कर जाये
पत्थर को पूजता जाये,इंसा के काम न आये
पत्थरों को वस्त्र पहनाए, इंसा ठंड में सिकुड़ता जाये।
पत्थरों को पकवान चढाये,इंसा के लिए अकाल पड़ जाये
चार दिवारी में पत्थरों को कैद रखा जाये,इंसा का दम फुटपाथों में टूटता जाये।
हर्फ़ों का बाजार भी सजता जायें
समाज की हक़ीक़त को दर्शाए।
दर्द को हर्फ़ों में समेटकर दर्द को महसूस करवाये।
अन्याय के खिलाफ़ हर्फ़ों का भंडार लगाये।
भूपेंद्र रावत
10/01/2017

Language: Hindi
2 Likes · 4740 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
आपसी समझ
आपसी समझ
Dr. Pradeep Kumar Sharma
गिरगिट रंग बदलने लगे हैं
गिरगिट रंग बदलने लगे हैं
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
फितरत
फितरत
मनोज कर्ण
नया है रंग, है नव वर्ष, जीना चाहता हूं।
नया है रंग, है नव वर्ष, जीना चाहता हूं।
सत्य कुमार प्रेमी
मुद्दतों बाद खुद की बात अपने दिल से की है
मुद्दतों बाद खुद की बात अपने दिल से की है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
"निशानी"
Dr. Kishan tandon kranti
जिससे एक मर्तबा प्रेम हो जाए
जिससे एक मर्तबा प्रेम हो जाए
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
नदी की तीव्र धारा है चले आओ चले आओ।
नदी की तीव्र धारा है चले आओ चले आओ।
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
हम क्यूं लिखें
हम क्यूं लिखें
Lovi Mishra
जिंदगी है कि जीने का सुरूर आया ही नहीं
जिंदगी है कि जीने का सुरूर आया ही नहीं
कवि दीपक बवेजा
■ मुक्तक
■ मुक्तक
*प्रणय प्रभात*
सेंधी दोहे
सेंधी दोहे
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
आदम का आदमी
आदम का आदमी
आनन्द मिश्र
सखि आया वसंत
सखि आया वसंत
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
*बदकिस्मत थे, जेल हो गई 【हिंदी गजल/गीतिका】*
*बदकिस्मत थे, जेल हो गई 【हिंदी गजल/गीतिका】*
Ravi Prakash
मुक्तक
मुक्तक
जगदीश शर्मा सहज
रात बसर हो जाती है यूं ही तेरी यादों में,
रात बसर हो जाती है यूं ही तेरी यादों में,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
मुश्किलों से क्या
मुश्किलों से क्या
Dr fauzia Naseem shad
"Always and Forever."
Manisha Manjari
दिसम्बर माह और यह कविता...😊
दिसम्बर माह और यह कविता...😊
पूर्वार्थ
*** पल्लवी : मेरे सपने....!!! ***
*** पल्लवी : मेरे सपने....!!! ***
VEDANTA PATEL
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
हमें अब राम के पदचिन्ह पर चलकर दिखाना है
Dr Archana Gupta
*काल क्रिया*
*काल क्रिया*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
शब्द
शब्द
Ajay Mishra
नेम प्रेम का कर ले बंधु
नेम प्रेम का कर ले बंधु
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
2437.पूर्णिका
2437.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कबीर एवं तुलसीदास संतवाणी
कबीर एवं तुलसीदास संतवाणी
Khaimsingh Saini
क्यों पड़ी है गांठ, आओ खोल दें।
क्यों पड़ी है गांठ, आओ खोल दें।
surenderpal vaidya
नई नसल की फसल
नई नसल की फसल
विजय कुमार अग्रवाल
ऐसे नाराज़ अगर, होने लगोगे तुम हमसे
ऐसे नाराज़ अगर, होने लगोगे तुम हमसे
gurudeenverma198
Loading...