Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Sep 2016 · 1 min read

देख चाँद गगन का

देख चॉद गगन से मुझे यूँ कहने लगा
इशारे इशारों में ही मुझे बुलाने लगा
आ जाओ अब छोड़ कर धरती तुम
कह कर चाँद इतना घूरने यूँ ही लगा

स्‍वप्‍न मेरे पानी के बुलबुलें जैसे ही हैं
तेरी नैनों के तीर से घायल हो जाते है
मेरे साथ तारों के बीच जा छुपा चाँद
रूप आज चाँद से मेरा निखर गया है

डॉ मधु त्रिवेदी

Language: Hindi
72 Likes · 470 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from DR.MDHU TRIVEDI
View all
You may also like:
सीखा दे ना सबक ऐ जिंदगी अब तो, लोग हमको सिर्फ मतलब के लिए या
सीखा दे ना सबक ऐ जिंदगी अब तो, लोग हमको सिर्फ मतलब के लिए या
Rekha khichi
गुस्ल ज़ुबान का करके जब तेरा एहतराम करते हैं।
गुस्ल ज़ुबान का करके जब तेरा एहतराम करते हैं।
Phool gufran
अतिथि हूं......
अतिथि हूं......
Ravi Ghayal
दिव्य बोध।
दिव्य बोध।
Pt. Brajesh Kumar Nayak
रमणीय प्रेयसी
रमणीय प्रेयसी
Pratibha Pandey
मुक्तक
मुक्तक
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
गुरु दीक्षा
गुरु दीक्षा
GOVIND UIKEY
बीत जाता हैं
बीत जाता हैं
TARAN VERMA
जो मेरी जान लेने का इरादा ओढ़ के आएगा
जो मेरी जान लेने का इरादा ओढ़ के आएगा
Harinarayan Tanha
बहू और बेटी
बहू और बेटी
Mukesh Kumar Sonkar
नई दिल्ली
नई दिल्ली
Dr. Girish Chandra Agarwal
लालच का फल
लालच का फल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
असुर सम्राट भक्त प्रह्लाद – गर्भ और जन्म – 04
असुर सम्राट भक्त प्रह्लाद – गर्भ और जन्म – 04
Kirti Aphale
💐प्रेम कौतुक-253💐
💐प्रेम कौतुक-253💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
'लक्ष्य-1'
'लक्ष्य-1'
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
अंताक्षरी पिरामिड तुक्तक
अंताक्षरी पिरामिड तुक्तक
Subhash Singhai
कभी भी ऐसे व्यक्ति को,
कभी भी ऐसे व्यक्ति को,
Shubham Pandey (S P)
2612.पूर्णिका
2612.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
वोट दिया किसी और को,
वोट दिया किसी और को,
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
मानता हूँ हम लड़े थे कभी
मानता हूँ हम लड़े थे कभी
gurudeenverma198
युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
युद्ध नहीं जिनके जीवन में,
Sandeep Mishra
अध्यापकों का स्थानांतरण (संस्मरण)
अध्यापकों का स्थानांतरण (संस्मरण)
Ravi Prakash
जल
जल
Saraswati Bajpai
कैसा समाज
कैसा समाज
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
ना जाने कैसी मोहब्बत कर बैठे है?
ना जाने कैसी मोहब्बत कर बैठे है?
Kanchan sarda Malu
एक और चौरासी
एक और चौरासी
Shekhar Chandra Mitra
■ #यादों_का_आईना
■ #यादों_का_आईना
*Author प्रणय प्रभात*
दोहे
दोहे
दुष्यन्त 'बाबा'
डाल-डाल तुम हो कर आओ
डाल-डाल तुम हो कर आओ
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
इतनी उम्मीद
इतनी उम्मीद
Dr fauzia Naseem shad
Loading...