Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Sep 2016 · 1 min read

दुर्मिल सवैया

दुर्मिल सवैया
॰॰॰
हम चाह रहे कुछ वक्त मिले इस जीवन मेँ कविता चलती
यह भागमभाग भरी दुनिया अब छोड़ कहीँ दिल मेँ पलती
कविता बिन चैन कहाँ कवि को यह साँस समा कर के ढलती
पर वक्त नहीँ मिलता पल तो यह बात बड़ी मन को खलती

– आकाश महेशपुरी

Language: Hindi
276 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from आकाश महेशपुरी
View all
You may also like:
🌺🦋सजल हैं नयन, दिल भर गया है🦋🌺
🌺🦋सजल हैं नयन, दिल भर गया है🦋🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
आकाश दीप - (6 of 25 )
आकाश दीप - (6 of 25 )
Kshma Urmila
#डॉ अरुण कुमार शास्त्री
#डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
कोई हिन्दू हो या मूसलमां,
कोई हिन्दू हो या मूसलमां,
Satish Srijan
घर में यदि हम शेर बन के रहते हैं तो बीबी दुर्गा बनकर रहेगी औ
घर में यदि हम शेर बन के रहते हैं तो बीबी दुर्गा बनकर रहेगी औ
Ranjeet kumar patre
!!दर्पण!!
!!दर्पण!!
पंकज पाण्डेय सावर्ण्य
हार स्वीकार कर
हार स्वीकार कर
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
అతి బలవంత హనుమంత
అతి బలవంత హనుమంత
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
#ग़ज़ल
#ग़ज़ल
*Author प्रणय प्रभात*
ड्रीम-टीम व जुआ-सटा
ड्रीम-टीम व जुआ-सटा
Anil chobisa
"अधूरी कविता"
Dr. Kishan tandon kranti
मेरे दिल के बहुत
मेरे दिल के बहुत
Dr fauzia Naseem shad
खुल जाता है सुबह उठते ही इसका पिटारा...
खुल जाता है सुबह उठते ही इसका पिटारा...
shabina. Naaz
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-152से चुने हुए श्रेष्ठ दोहे
बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-152से चुने हुए श्रेष्ठ दोहे
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
साज सजाए बैठा जग के, सच से हो अंजान।
साज सजाए बैठा जग के, सच से हो अंजान।
डॉ.सीमा अग्रवाल
तिमिर घनेरा बिछा चतुर्दिक्रं,चमात्र इंजोर नहीं है
तिमिर घनेरा बिछा चतुर्दिक्रं,चमात्र इंजोर नहीं है
पूर्वार्थ
तेवर
तेवर
Dr. Pradeep Kumar Sharma
1-	“जब सांझ ढले तुम आती हो “
1- “जब सांझ ढले तुम आती हो “
Dilip Kumar
भीतर का तूफान
भीतर का तूफान
Sandeep Pande
बिन गुनाहों के ही सज़ायाफ्ता है
बिन गुनाहों के ही सज़ायाफ्ता है "रत्न"
गुप्तरत्न
यादें
यादें
Versha Varshney
खुशी और गम
खुशी और गम
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
प्ले स्कूल हमारा (बाल कविता )
प्ले स्कूल हमारा (बाल कविता )
Ravi Prakash
स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
मजदूरों के साथ
मजदूरों के साथ
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
महसूस होता है जमाने ने ,
महसूस होता है जमाने ने ,
ओनिका सेतिया 'अनु '
हमदम का साथ💕🤝
हमदम का साथ💕🤝
डॉ० रोहित कौशिक
जीवन का मुस्कान
जीवन का मुस्कान
Awadhesh Kumar Singh
करना था यदि ऐसा तुम्हें मेरे संग में
करना था यदि ऐसा तुम्हें मेरे संग में
gurudeenverma198
हम पर कष्ट भारी आ गए
हम पर कष्ट भारी आ गए
Shivkumar Bilagrami
Loading...