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11 Feb 2023 · 1 min read

दिल का दर्द आँख तक आते-आते नीर हो गया ।

दिल का दर्द आँख तक आते-आते नीर हो गया ।
हँसकर सही पीर जिसने जगत में फकीर हो गया ।
सहमे -सहमे से भटक रहे हैं झूठे लोग यहाँ –
बिना डरे सच बोला जिसने वही कबीर हो गया ।।

✍️ अरविन्द त्रिवेदी
उन्नाव उ० प्र०

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