Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 Dec 2022 · 1 min read

थियोसॉफिकल सोसायटी की एक अत्यंत सुंदर *यूनिवर्सल प्रेयर* है जो उसके सभी कार्यक्र

थियोसॉफिकल सोसायटी की एक अत्यंत सुंदर यूनिवर्सल प्रेयर है जो उसके सभी कार्यक्रमों में पढ़कर कही जाती है । मैंने इसका काव्य-रूपांतरण एक मुक्तक के रूप में करने का प्रयास किया है । यूनिवर्सल प्रेयर तथा मेरे द्वारा रचित मुक्तक इस प्रकार है:-

जीवन-तत्व (मुक्तक)
■■■■■■■■■■■■
जीवन-तत्व निहित हर कण-कण में कंपनमय पाते
हर प्राणी को वह अदृश्य निज आभा से चमकाते
प्रेमरुप एकात्म – भाव वह एकाकारी अनुभव
वह सब में , सब उसमें ज्ञानी कहते नहीं अघाते
■■■■■■■■■■□■■■■■■■■
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा रामपुर (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल 99976 15451

167 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
अकेला खुदको पाता हूँ.
अकेला खुदको पाता हूँ.
Naushaba Suriya
🙏🙏सुप्रभात जय माता दी 🙏🙏
🙏🙏सुप्रभात जय माता दी 🙏🙏
Er.Navaneet R Shandily
तितली
तितली
Dr. Pradeep Kumar Sharma
करारा नोट
करारा नोट
Punam Pande
मतदान
मतदान
Sanjay ' शून्य'
हासिल नहीं था
हासिल नहीं था
Dr fauzia Naseem shad
महानगर की जिंदगी और प्राकृतिक परिवेश
महानगर की जिंदगी और प्राकृतिक परिवेश
कार्तिक नितिन शर्मा
मंज़िल का पता है न ज़माने की खबर है।
मंज़िल का पता है न ज़माने की खबर है।
Phool gufran
जीने दो मुझे अपने वसूलों पर
जीने दो मुझे अपने वसूलों पर
goutam shaw
■
■ "हेल" में जाएं या "वेल" में। उनकी मर्ज़ी।।
*Author प्रणय प्रभात*
ये   दुनिया  है  एक  पहेली
ये दुनिया है एक पहेली
कुंवर तुफान सिंह निकुम्भ
अगर
अगर "स्टैच्यू" कह के रोक लेते समय को ........
Atul "Krishn"
बुरा न मानो, होली है! जोगीरा सा रा रा रा रा....
बुरा न मानो, होली है! जोगीरा सा रा रा रा रा....
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
** मुक्तक **
** मुक्तक **
surenderpal vaidya
शाकाहार बनाम धर्म
शाकाहार बनाम धर्म
मनोज कर्ण
शब्द
शब्द
Neeraj Agarwal
कितना मुश्किल है केवल जीना ही ..
कितना मुश्किल है केवल जीना ही ..
Vivek Mishra
💐प्रेम कौतुक-538💐
💐प्रेम कौतुक-538💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
उलझते रिश्तो में मत उलझिये
उलझते रिश्तो में मत उलझिये
Harminder Kaur
हर कदम प्यासा रहा...,
हर कदम प्यासा रहा...,
Priya princess panwar
*सत्य  विजय  का पर्व मनाया*
*सत्य विजय का पर्व मनाया*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
कुछ जवाब शांति से दो
कुछ जवाब शांति से दो
पूर्वार्थ
2768. *पूर्णिका*
2768. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
क्या खोया क्या पाया
क्या खोया क्या पाया
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
हास्य कथा : एक इंटरव्यू
हास्य कथा : एक इंटरव्यू
Ravi Prakash
मुझे ना छेड़ अभी गर्दिशे -ज़माने तू
मुझे ना छेड़ अभी गर्दिशे -ज़माने तू
shabina. Naaz
प्रेम
प्रेम
Prakash Chandra
"शब्दों का संसार"
Dr. Kishan tandon kranti
सदियों से रस्सी रही,
सदियों से रस्सी रही,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
हिय  में  मेरे  बस  गये,  दशरथ - सुत   श्रीराम
हिय में मेरे बस गये, दशरथ - सुत श्रीराम
Anil Mishra Prahari
Loading...