Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Oct 2022 · 2 min read

तुलसी दास जी के

संत कवि तुलसीदास जी प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त थे । राम उनके लिए साक्षात् ब्रह्म के अवतार थे और सीता आदि शक्ति ।
उनकी भक्ति में ‘सियाराम मय जगत’ के अतिरिक्त और कुछ नहीं था ।
दास भक्ति की परंपरा में वे अद्वितीय हैं ।
लेकिन समस्त ग्रंथों में दार्शनिक झाँकियाँ और युक्ति-युक्तपूर्ण भक्ति का मंडन भरा है ।
तुलसीदास जी की समग्र दृष्टि में ज्ञान,भक्ति, कर्म, दर्शन एवं
वैराग्य का सामंजस्य पूर्ण रूप से समाया ‌
हुआ है।
इसीकारण वे राम को समष्टि रूप में लोकनायक का आदर्श रूप दे सके हैं । राम का प्रत्येक संभव रूप मानव जाति के लिए आज भी प्रेरणास्रोत है ।
राम ईश्वर रूप होते हुए भी मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और लोक संग्रह की भावना के प्रतिनिधि हैं ।
तुलसीदास जी के लिए सगुण और निर्गुण व्यर्थ हैं । उनके ही
शब्दों में-:

” जो गुन रहित सगुन सोइ कैसे।
जनु हिम उपल विलग नहि जैसे ।। ”

उनके नाम और रूप भी ईश्वर तत्व की दो उपाधियाँ मात्र हैं । फिर भी नाम ‘राम’ से बड़ा है ।

” ब्रह्म राम ते नाम बड़, बरदायक बर दानि ।
रामायण शतकोटि महँ, लिय महेश जिय जानि ।।”

तुलसीदास की पहली दृष्टि से मानव जीवन का कोई भी व्यवहारिक पक्ष नहीं छूट पाया है ।

पारिवारिक, सामाजिक,धार्मिक एवं राज-नैतिक जीवन की विविध जटिल परिस्थि-तियों एवं मानसिक व्यापारों का चित्रण उनके ग्रंथों में भरा पड़ा है ।

तुलसी वाह्य एवं अंतर्जगत के सफल कवि हैं । तुलसी के राम करुणानिधि हैं । इसलिए भक्त की पुकार मात्र से उसे क्षमा करना उनकी बान है । राम का नियम एक मात्र समर्पण ही प्रथम् एवं अंतिम कर्तव्य है । राम बिना हेतु करुणागार हैं । जैसे-

” रहति न प्रभु चित चूक किए की ।
करत सुरति सय बार हिए की ।
सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं ।
जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं ।। ”

अत: उपरोक्त समस्त भाव, महाकवि तुलसीदास जी के ग्रंथों में भरे पड़े हैं । जो सिद्ध करते हैं कि वह प्रभु राम के दास्य भाव के पोषक कवि हैं ।

‌‌ शिवकुमार बर्मन ✍️

7 Likes · 6 Comments · 668 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बुलन्द होंसला रखने वाले लोग, कभी डरा नहीं करते
बुलन्द होंसला रखने वाले लोग, कभी डरा नहीं करते
The_dk_poetry
जुगाड़
जुगाड़
Dr. Pradeep Kumar Sharma
शब्द गले में रहे अटकते, लब हिलते रहे।
शब्द गले में रहे अटकते, लब हिलते रहे।
विमला महरिया मौज
*अनुशासन के पर्याय अध्यापक श्री लाल सिंह जी : शत शत नमन*
*अनुशासन के पर्याय अध्यापक श्री लाल सिंह जी : शत शत नमन*
Ravi Prakash
मौत का रंग लाल है,
मौत का रंग लाल है,
पूर्वार्थ
विषम परिस्थितियों से डरना नहीं,
विषम परिस्थितियों से डरना नहीं,
Trishika S Dhara
करवाचौथ
करवाचौथ
Neeraj Agarwal
बिना कोई परिश्रम के, न किस्मत रंग लाती है।
बिना कोई परिश्रम के, न किस्मत रंग लाती है।
सत्य कुमार प्रेमी
“कब मानव कवि बन जाता हैं ”
“कब मानव कवि बन जाता हैं ”
Rituraj shivem verma
నేటి ప్రపంచం
నేటి ప్రపంచం
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
Uljhane bahut h , jamane se thak jane ki,
Uljhane bahut h , jamane se thak jane ki,
Sakshi Tripathi
■ आप आए, बहार आई ■
■ आप आए, बहार आई ■
*Author प्रणय प्रभात*
" आज़ का आदमी "
Chunnu Lal Gupta
राम है आये!
राम है आये!
Bodhisatva kastooriya
*जी लो ये पल*
*जी लो ये पल*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
💐प्रेम कौतुक-478💐
💐प्रेम कौतुक-478💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
थोपा गया कर्तव्य  बोझ जैसा होता है । उसमें समर्पण और सेवा-भा
थोपा गया कर्तव्य बोझ जैसा होता है । उसमें समर्पण और सेवा-भा
Seema Verma
जाने  कैसे दौर से   गुजर रहा हूँ मैं,
जाने कैसे दौर से गुजर रहा हूँ मैं,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
अपनी मनमानियां _ कब तक करोगे ।
अपनी मनमानियां _ कब तक करोगे ।
Rajesh vyas
वो लम्हें जो हर पल में, तुम्हें मुझसे चुराते हैं।
वो लम्हें जो हर पल में, तुम्हें मुझसे चुराते हैं।
Manisha Manjari
स्वाल तुम्हारे-जवाब हमारे
स्वाल तुम्हारे-जवाब हमारे
Ravi Ghayal
हम रंगों से सजे है
हम रंगों से सजे है
'अशांत' शेखर
अक्सर आकर दस्तक देती
अक्सर आकर दस्तक देती
Satish Srijan
वक्त से पहले..
वक्त से पहले..
Harminder Kaur
#काहे_ई_बिदाई_होला_बाबूजी_के_घर_से?
#काहे_ई_बिदाई_होला_बाबूजी_के_घर_से?
संजीव शुक्ल 'सचिन'
रक्त को उबाल दो
रक्त को उबाल दो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
खुद को भी
खुद को भी
Dr fauzia Naseem shad
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
2584.पूर्णिका
2584.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कह दो ना उस मौत से अपने घर चली जाये,
कह दो ना उस मौत से अपने घर चली जाये,
Sarita Pandey
Loading...